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श्रीमद्भगवत कथा संसार के सभी ग्रंथों का सार: ठाकुर कृष्ण चंद्र शास्त्री

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राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी के सानिध्य में आश्रम कोटला कलां में चल रही भागवत कथा

ऊना/सुशील पंडित : देवभूमि हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना स्थित उत्तरी भारत की सुप्रसिद्ध नगरी श्री राधा कृष्ण मंदिर एवं राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी आश्रम कोटला कलां के सानिध्य में चल रहे धार्मिक महासम्मेलन के श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन के सुप्रसिद्ध कथावाचक ठाकुर कृष्ण चंद्र शास्त्री जी महाराज ने अपने मुखारविंद से प्रवचनों की बौछार करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवत कथा संसार के सभी ग्रंथों का सार व योगशास्त्र है। क्योंकि प्राचीन काल से ही योग का अस्तित्व देखा जा सकता है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण श्रीमद्भागवत कथा ही है, जो सभी ग्रंथों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रचित इसमें व्यक्ति के जीवन का मूल सार है और इस ग्रंथ में महाभारत काल से लेकर द्वापर तक श्री कृष्ण की सभी लीलाओं का वर्णन किया गया है। कथा व्यास ने बताया कि भगवत कथा में पहली बार योग शब्द श्रीकृष्ण (जिनको योगेश्वर श्रीकृष्ण भी कहते हैं) ने अर्जुन को अपने जीवन में असमर्थता पर काबू पाने के लिए प्रदान किया था और गीता में वर्णित 18 अध्याय हमको श्रीकृष्ण द्वारा उल्लेखित योग के बारे में बताते हैं। इन अठारह अध्यायों में से प्रत्येक को अलग-अलग नामों में नामित किया गया है वहीं भगवान द्वारा रचित प्रत्येक अध्याय हमारे शरीर और दिमाग को प्रशिक्षित करता है।

उन्होंने कहा कि गीता के पहले अध्याय में अर्जुन विशाद योग है। चितकों को लगा कि कहीं विशाद भी योग बन सकता है। विशाद को आज की भाषा में डिप्रेशन कहते हैं। उन्होंने कहा कि गीता गोविंद की वाणी है। ऐसे में गीता को हमें अपने जीवन में धारण कर उसे व्यवहार व दिनचर्या में लाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि धर्म केवल प्रदर्शन की वस्तु नहीं है। हमारे वेदों में कहा गया है कि सत्य बोलो, धर्म को आचरण में लाओ, जब हम अपनी कुंठा को त्याग कर इन बातों पर ध्यान देंगे तो हमें अपने आप गीता का ज्ञान मिलना शुरू हो जाएगा। इस दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए।

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