ऊना/ सुशील पंडित :अटल बिहारी वाजपेई राजकीय महाविद्यालय बंगाणा में राजनीति विज्ञान विभाग के विभागअध्यक्ष प्रोफेसर सिकंदर नेगी के अध्यक्षता में विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। मंच का संचालन राजनीति विज्ञान की उपप्रधान इंदू ने किया। विशेष सेमिनार का विषय समान नागरिक संहिता, और पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा), 1996 था। सेमिनार के मुख्य वक्ता बीए फाइनल ईयर की छात्रा सपना, बीए द्वितीय की छात्रा तानिया और गौरी देवी थी।
सबसे पहले फाइनल ईयर की छात्रा सपना ने समान नागरिक संहिता पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता एक सामाजिक मामलों से संबंधित कानून होता है जो सभी पंथ के लोगों के लिये विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत व बच्चा गोद लेने आदि में समान रूप से लागू होता है।फिलहाल समान नागरिक संहिता भारत में नागरिकों के लिए एक समान कानून को बनाने और लागू करने का एक प्रस्ताव है जो सभी नागरिकों पर उनके धर्म, लिंग और यौन अभिरुचि की परवाह किए बिना समान रूप से लागू होगा।
वर्तमान में, विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानून उनके धार्मिक ग्रंथों द्वारा शासित होते हैं। इसके बाद तानिया ने पैसा अधिनियम 1996 पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण : पेसा ग्राम सभाओं को विकास योजनाओं की मंज़ूरी देने और सभी सामाजिक क्षेत्रों को नियंत्रित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने का अधिकार देता है।पेसा अधिनियम 1996 ने आदिवासियों को उनके रीति-रिवाजों, परंपराओं और जीवन शैली को बनाए रखते हुए सत्ता और विकास की बागडोर सौंप दी।
1947 में आज़ादी के बाद जब 1950 में संविधान लागू हुआ तो इन क्षेत्रों को 5वीं और 6वीं अनुसूची में वर्गीकृत किया गया । इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग के विभागअध्यक्ष प्रोफेसर सिकंदर नेगी, राजनीति विज्ञान के उपप्रधान इंदू,महासचिव परीक्षा, सह सचिव अंशु, कैशियर तीक्ष्ण, मीडिया प्रभारी रोहित मौजूद रहे।