नई दिल्ली: आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और बदलते मौसम के चलते कई लोग किसी न किसी तरह की स्किन संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। मुंहासे, एलर्जी, रफ स्किन या फिर ड्राईनेस यह समस्याएं आम हो गई है। पहले इन्हें आम समस्याएं माना जाता था परंतु अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन सभी को स्किन की बीमारियों की गंभीर लिस्ट में शामिल कर दिया है। ऐसे में यह फैसला उन लोगों के लिए राहत भरा होगा जो स्किन संबंधी दिक्कतों से जूज रहे हैं। WHO ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया है। सनस्क्रीन और मॉइश्चराइजर अब जरुरी दवाईयों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं। अब ये सिर्फ कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स ही नहीं बल्कि इलाज का हिस्सा भी माने जाएंगे। ‘
बीमारियों में काम आएगी सनस्क्रीन मॉइश्चराइजर
विश्व स्वास्थ्य सगंठन ने कहा कि सनस्क्रीन और मॉइश्चराइजर सिर्फ स्किन को निखारने ही नहीं बल्कि कई गंभीर स्किन बीमारियों से बचाने और उनका इलाज करने में भी मदद करेगी। खासतौर पर जिन लोगों को एल्बिनिज्म या एटोपिक डर्मेटाइटिस है उनके लिए यह जरुरी दवाईयों के तौर पर शामिल होगी। अब इन प्रोडक्ट्स को सरकार और स्वास्थ्य संगठन दवाईयों की तरह इस्तेमाल करेंगे और मरीजों को कम कीमत पर यह मिल पाएंगी।
स्किन की गंभीर बीमारियां बनेगी खतरा
बहुत से लोग स्किन की बीमारियों को नॉर्मल ही मानते हैं परंतु कुछ बीमारियां इतनी खतरनाक होती है कि व आपको पूरी जिंदगी परेशान कर सकती हैं। यह बीमारियां आपके लिए जानलेवा भी बन सकती हैं। स्किन की आम बीमारियों में मुंहासें, खुजली और रैशेज, एग्जिमा, एलर्जी और एलोपेसिया एरीटा शामिल है। वहीं स्किन की गंभीर बीमारियों में सोरायसिस, रोसैसिया, विटिलिगो और मेलेनोमा होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह मानना है कि इन बीमारियों को यदि शुरुआत में पहचान लिया जाए और इनका इलाज मिल पाए तो स्थिति संभाली जा सकती है।
Global Action Plan लॉन्च करेगा विश्व स्वास्थ्य संगठन
विश्व स्वास्थ्य संगठन अब इस दिशा में एक अहम कदम उठाने वाला है। अगले साल wHO एक Global Action Plan लॉन्च करने वाला है। इस प्लान का मकसद दुनियाभर में स्किन की बीमारियों को लेकर जागरुकता फैलना, इलाज आसान बनाना और सस्ती दवाईयां देना है। इसकी जानकारी ग्लोबल स्किन नाम की संस्था की सीईओ जेनिफर ऑस्टिन ने दी। उन्होंने कहा कि WHO के इस कदम से इलाज की लागत कम हो जाएगी और स्किन संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राहत मिलेगी। डब्ल्यूएचओ के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब स्किन की बीमारियों से जूझ रहे गरीब और मिडिल क्लास लोग अब कम
