लखनऊः भारत के शुभांशु शुक्ला और पोलैंड, अमेरिका और हंगरी के 3 और प्राइवेट अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर एक्सिम मिशन 4 (एक्स-4) वीरवार शाम करीब 4 बजे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर डॉक किया। वह 14 दिनों तक यहां रहकर रिसर्च करेंगे। 41 साल के लंबे इंतजार के बाद भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचे हैं और इस तरह वे ऑर्बिटिंग लैब तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए। ह्यूस्टन स्थित एक्सिम स्पेस ने करीब एक महीने की देरी और कई बार स्थगित होने के बाद बुधवार को दोपहर 12.01 बजे फ्लोरिडा के केप कैनावेरल में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से आईएसएस के लिए अपना चौथा क्रू मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
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— Encounter India (@Encounter_India) June 26, 2025
यह इतिहास रचे जाने के बाद शुभांशु शुक्ला के मां-बाप भी भावुक हो गए। शुभांशु की इस उपलब्धि से सिर्फ देश और उनका परिवार बहुत खुश है। शुभांशु के माता-पिता गर्व का अनुभव कर रहे हैं, हो भी क्यों ना. बेटा इतिहास जो रचने जा रहा है। शुभांशु के पिता शंभू दयाल ने कहा कि उनके बेटे की उपलब्धि न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे देश के लिए गौरव की बात है। पिता ने कहा, उनका मिशन दोपहर 12 बजे के आसपास लॉन्च होने वाला है। उनके मिशन को लॉन्च होते देखने के लिए हम बहुत उत्सुक और खुश हैं। हमारा आशीर्वाद उनके साथ है. ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनका मिशन अच्छी तरह से पूरा हो। शुभांशु के लिए लगाए गए सभी पोस्टर देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। वह लखनऊ ही नहीं राज्य और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। हमें उन पर गर्व है।
दरअसल, शुभांशु शुक्ला के साथ इस मिशन पर पोलैंड के मिशन स्पेशलिस्ट स्लावोज उज्नास्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू के साथ अमेरिका की कमांडर पैगी व्हिटसन भी सवार हैं। व्हिसटसन नासा की अंतरिक्ष यात्री रह चुकी हैं और अब एक्सिओम स्पेस कंपनी के लिए काम करती हैं। 24 घंटे से ज्यादा समय तक परिक्रमा करने के बाद, फाल्कन 9 रॉकेट पर सवार स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल में सवार क्रू वीरवार को अंतरिक्ष स्टेशन के साथ डॉक करने वाला है।
अंतरिक्ष में स्थित इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) अंतरिक्ष यात्रियों के घर का जैसा है। अमेरिका की तरफ से मनुष्यों को अंतरिक्ष में ले जाने वाले कई अंतरिक्षयान लॉन्च किए गए हैं। साथ ही उसने ISS पर माइक्रोग्रैविटी में महीनों तक मिशन चलाए हैं। जबकि उनका अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष स्टेशन पर ‘डॉक’ रहा। ‘डॉकिंग’ तब होती है जब कोई अंतरिक्ष यान अपने आप अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ता है और मैन्युवर करता है। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन डॉकिंग को ‘मेटिंग ऑपरेशंस’ के तौर पर बताता है जहां एक एक्टिव व्हीकल अपनी ताकत के साथ मेटिंग इंटरफेस में उड़ता है। वहीं इसरो के अनुसार अंतरिक्ष में डॉकिंग टेक्नोलॉजी का प्रयोग तब होता है जब सामान्य मिशन मकसदों को हासिल करने के लिए कई रॉकेट अंतरिक्ष में लॉन्च किए जाते हैं।
शुभांशु शुक्ला और पूरा क्रू 14 दिनों तक आईएसएस पर रहेगा। इस दौरान ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला नासा की मदद से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और डिपार्टमेंट ऑफ बायो टेक्नोलॉजी (डीबीटी) के बीच सहयोग के तहत विकसित स्पेशल फूड एंड न्यूट्रिशियस संबंधी एक्सपेरीमेंट से जुड़े एक्सपेरीमेंट्स करेंगे। इसरो ने शुक्ला के लिए 7 प्रयोगों का एक सेट तैयार किया है। यह नासा की तरफ से अपने ह्यूमन रिसर्च प्रोग्राम के लिए तय पांच ज्वॉइन्ट स्टडीज में भी हिस्सा लेंगे। नासा ने आईएसएस पर एक्सपेरीमेंट्स के लिए भारतीय भोजन पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बनाई है। इसमें माइक्रोग्रैविटी स्थितियों में मेथी और मूंग यानी हरा चना को अंकुरित करना शामिल है।
