अधिकारियों को अदालत में भुगतना पड़ेगा अंजाम
ऊना सुशील पंडित: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं ऊना विधानसभा क्षेत्र के विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने चताड़ा पंचायत प्रधान नीलम कुमारी का निलंबन रद्द होने पर उन्हें बधाई देते हुए प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह फैसला साफ तौर पर साबित करता है कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक द्वेष के चलते निशाना बनाया जा रहा है।
सत्ती ने कड़े शब्दों में कहा कि केवल चताड़ा ही नहीं, बल्कि ऊना जिला की कई पंचायतों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बिना समयबद्ध और निष्पक्ष जांच के निलंबित किया गया। यह न केवल लोकतंत्र का अपमान है, बल्कि जनता के जनादेश को कुचलने का प्रयास भी है।
विधायक ने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन कानून से ऊपर जाकर की गई कार्रवाई का हिसाब अदालत में देना पड़ता है। जब ऐसे मामलों में अधिकारी अदालतों में घसीटे जाएंगे, तब कोई भी नेता उनके साथ खड़ा नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी भी राजनीतिक दबाव में आकर दुर्भावना से काम न करें। चुने हुए जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित और अपमानित करने की यह प्रवृत्ति भविष्य में प्रशासन के लिए भारी पड़ सकती है। सत्ती ने कहा कि निलंबन रद्द होने का कारण यह बताया गया कि मामले में समयबद्ध जांच ही नहीं की गई, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पूरी कार्रवाई राजनीतिक द्वेष से प्रेरित थी। विधायक सतपाल सत्ती ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की सरकार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को टालने का काम पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को टालने का काम कर रही है। दरअसल कांग्रेस पंचायती राज संस्थाओं के साथ-साथ स्थानीय निकायों के चुनाव में अपनी हर को देखकर बुरी तरह बौखला चुकी है यही कारण है कि वह इन चुनावों को ही रोकने का काम कर रही है।
उन्होंने कानून व्यवस्था की बदहाली को लेकर भी सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को जमकर आड़े हाथ लिया। विधायक ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की अपराधियों पर एक नहीं चल रही, जबकि अधिकारी चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अपमानित और प्रताड़ित करने का काम कर रहे हैं।