अमृतसरः अमृतसर स्थित श्री आनंदम धाम ट्रस्ट के संस्थापक व प्रमुख संत, सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने आज श्री हरमंदिर साहिब में मात्था टेका और गुरु घर की अद्वितीय शांति, आनंद और विनम्रता का अनुभव किया। उनके साथ 12-13 अन्य संगतें भी उपस्थित थीं। उन्होंने कहा कि यहां आकर उन्हें जो शांति और आत्मिक संतुष्टि का अनुभव हुआ, वह दुनिया के किसी अन्य तीर्थस्थल पर नहीं मिला। मैं यहां फिर से आना चाहूंगा, हर व्यक्ति को यहां आना चाहिए।
उन्होंने भावपूर्ण भाव से बताया कि जब वे श्री दरबार साहिब में प्रवेश करते हैं, तभी मन में एक अलौकिक तरंग का अनुभव होता है। अन्य स्थानों पर दर्शन के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, लेकिन यहां विनम्रता सिखाने वाली नीची सीढ़ियां मन को विनम्र बनाती हैं। यह केवल दर्शन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति की यात्रा है। वृंदावन से अमृतसर आने का उद्देश्य केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शताब्दी से संबंधित गतिविधियों में भाग लेना और उनके बलिदान को जन-जन तक पहुंचाना भी था। जब हमारी रक्षा नहीं हो पा रही थी, तब सिखों ने पंच ककारों से हमारी रक्षा की।
सिख हमारे बड़े भाई हैं। गुरु साहिब केवल सिखों के ही नहीं, बल्कि समस्त मानवता के गुरु हैं। उन्होंने सिख धर्म की सांस्कृतिक विशालता और गुरुओं की समतावादी सोच को पूरी दुनिया में प्रचारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। राधा-कृष्ण के प्रचारक सद्गुरु रितेश्वर जी ने अंत में कहा कि हम यहाँ आकर एक नए आध्यात्मिक दर्शन से जुड़े हैं। सिख धर्म हमारे लिए केवल एक धर्म नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति बन गया है।
