नई दिल्ली : राजधानी में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में देश के कॉरपोरेट जगत से एक ऐसा ऐलान हुआ है जिसने टेक्नोलॉजी सेक्टर में हलचल मचा दी है। मुकेश अंबानी ने घोषणा की है कि रिलांयस इंडस्ट्रीज और जियो इंटेलिजेंसी मिलकर अगले सात सालों में 10 लाख करोड़ का निवेश करेंगे। उनका दावा है कि यह निवेश भारत को 21वीं सदी की सबसे बड़ी एआई ताकतों में शामिल करेगा।
मुकेश अंबानी ने कहा कि जिस तरह जियो ने देश को सस्ते इंटरनेट से जोड़ा है उसी तरह अब इंटेलिजेंस युग से जोड़ा जाएगा। उनका टारगेट है कि एआई हर नागरिक, हर उद्योग और हर सरकारी सेा तक पहुंचने पर वह बेहद किफायती लागत पर। उन्होंने साफ कहा है कि भारत इंटेलिजेंस किराए पर नहीं ले सकता इसलिए कंप्यूटिंग और एआई सेवाओं की लागत को डेटा की तरह सस्ता बनाना ही प्राथमिकता होगी।
जामनगर में बनाए जा रहे
अंबानी ने बताया कि जामनगर में मल्टी गीगावॉट क्षमता वाले एआई रेडी डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं। इस साल की दूसरी छमाही में 120 मेगावॉट क्षमता ऑऩलाइन आ जाएगी। इसे आगे गीगावॉट स्तर तक बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही कच्छ और आंध्र प्रदेश में सौर ऊर्जा आधारित 10 गीगावॉट तक की ग्रीन पॉवर क्षमता का इस्तेमाल करके एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को एनर्जी दी जाएगी। एक नेशनल एज कंप्यूट नेटवर्क भी तैयार होगा। इसे एआई सेवाएं कम लेटेंसी और कम लागत पर देशभर में उपलब्ध होगी।
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— Encounter India (@Encounter_India) February 19, 2026
भारत की भाषा में बात करेगा एआई
अंबानी ने कहा कि एआई सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए नहीं होगा बल्कि यह किसानों, छात्रों और छोटे व्यवसाय करने वालों के लिए भी फायदेमंद रहेगा। जियो शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती जैसी क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल कर रहा है जैसे छात्रों के लिए कई भाषाओं में पढ़ाने वाले एआई टीचर, स्थानीय भाषा में स्वास्थ्य सलाह देने वाला गाइड और किसानों को सैटेलाइट से खेती संबंधी सुझाव देने वाला सिस्टम। उन्होंने कहा कि एआई भारत की भाषा में बोलेगा। भारत की संस्कृति में फूलेगा और भारत की मिट्टी में फलेगा।
भारत में बनेगा एआई सुपरपॉवर
अंबानी के अनुसार, भारत की ताकत उसकी जनसंख्या, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्टर, कम डेटा लागत और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम में है। आधार, यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने मजबूत नींव तैयार कर दी है। उन्होंने भरोसा भी जताया है कि यदि एआई को लोकतांत्रिक और किफायती बनाया गया तो यह गरीबी कम करने और समृद्धि बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम बनेगा।