टुकड़े टुकड़े का गैंग फिर सक्रिय होने के संकेत, आंदोलन करने की पूरी आजादी,लेकिन आपत्ति जनक नारे लगाने पर दिल्ली सरकार करे उचित कार्यवाही
ऊना/सुशील पंडित: दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन के दौरान कथित रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्ति जनक नारे लगाए जाने को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। जिला ऊना भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के सोशल मीडिया संयोजक राहुल शर्मा ने इस घटना पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
राहुल शर्मा ने अपने जारी बयान में कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी मुद्दे पर शांतिपूर्ण विरोध किया जा सकता है, लेकिन आंदोलन की आड़ में देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता के लिए भी घातक हो सकता है। राहुल शर्मा ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा को लांघती हैं।
भाजयुमो नेता राहुल शर्मा ने आरोप लगाया कि जेएनयू परिसर में एक बार फिर तथाकथित “टुकड़े-टुकड़े गैंग” सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं, जो पूर्व में भी विवादों का कारण बन चुका है। राहुल शर्मा का कहना है कि इस प्रकार के नारे और गतिविधियां युवाओं को गलत दिशा में ले जा सकती हैं और इसका दूरगामी नकारात्मक प्रभाव देश की एकता और अखंडता पर पड़ सकता है।
राहुल शर्मा ने दिल्ली की भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री मती रेखा गुप्ता से आग्रह किया कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। राहुल शर्मा ने कहा कि जेएनयू में जो भी आंदोलनकारी, विशेषकर वे लोग जो भारत सरकार और संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगा रहे हैं, उनके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका मानना है कि समय रहते सख्त कदम उठाए जाने से भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है।
राहुल शर्मा ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय परिसरों को शिक्षा और शोध का केंद्र होना चाहिए, न कि राजनीतिक उन्माद और देश विरोधी गतिविधियों का मंच। उन्होंने दिल्ली प्रशासन से अपील की कि कैंपस में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू किए जाएं और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ बिना भेदभाव के कार्रवाई हो। राहुल शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम पर अन्य राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की भी नजर बनाने का आग्रह किया। राहुल ने कहा कि छात्र आंदोलनों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय हित भी सुरक्षित रहें।
