कैलिफोर्नियाः अमेरकिामें कैलिफोर्निया के ईस्ट बे इलाके में 3 दशक से रह रहीं पंजाबी दादी 73 वर्षीय सिख बुजुर्ग हरजीत कौर को कुछ दिन पहले US इमिग्रेशन एंड कस्टम्स इन्फोर्समेंट ने अचानक हिरासत में ले लिया था। उन पर गैरकानूनी ढंग से रहने का आरोप लगा था। लेकिन अब उन्हें मजबूरन डिपोर्ट कर दिया गया। गौर हो कि इस मामले को लेकर अमेरिका की सड़कों पर लोग पोस्टर लेकर खड़े हो गए थे और सवाल कर रहे हैं, “क्या यही इंसानियत है?” दरअसल, हरजीत कौर 1992 में अपने 2 बेटों के साथ अमेरिका आई थीं।
ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹੋ:
उन्होंने अकेले दम पर बच्चों को पाला, सिलाई का काम किया और एक साधारण लेकिन सम्मानजनक जिंदगी जीनी शुरू की, लेकिन 8 सितंबर 2025 को जब वो सैन फ्रांसिस्को के ICE दफ्तर सिर्फ कागज जमा करने गईं। तभी उन्हें अचानक पकड़कर बेकर्सफ़ील्ड स्थित Mesa Verde ICE डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हरजीत कौर का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उनकी पोती सुखदीप कौर ने भावुक होकर कहा, “वो सिर्फ मेरी दादी नहीं, सबकी दादी हैं। उन्होंने हमेशा सबका ख्याल रखा। वो मेहनती हैं, निस्वार्थी हैं और पूरे समुदाय की मां जैसी हैं।” कुछ दिन पहले एलब सोब्रांटे के गुरुद्वारे के बाहर करीब 200 लोग इकट्ठा हुए।
इस दौरान सबके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था- “Bring Grandma Home” और “Hands Off Our Grandma”. राहगीर भी कार के हॉर्न बजाकर समर्थन दे रहे थे। हरक्यूलिस सिटी काउंसिल के सदस्य दिली भट्टराई ने कहा, “वो किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा रही थीं। वो हमारी ही तरह एक जिम्मेदार नागरिक हैं।” कांग्रेस सदस्य जॉन गरामेंडी ने भी इस गिरफ्तारी को “गलत प्राथमिकताएं” बताया और कहा कि ICE को अपराधियों पर ध्यान देना चाहिए, न कि दशकों से नियम मानने वाली बुज़ुर्ग दादी पर। कैलिफोर्निया असेंबली के सदस्य एलेक्स ली ने भी कहा कि हरजीत कौर “सही तरीके से सब कर रही थीं, फिर भी उनके साथ गलत हुआ।”