फिरोजपुरः केंद्र सरकार द्वारा पंजाब यूनिवर्सिटी की 59 साल पुरानी सीनेट और सिंडिकेट का भंग करने पर पंजाब भर के कॉलेज के छात्रों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। इसे लेकर छात्रों ने आज भाजपा के खिलाफ कॉलेजों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार व भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सीनेट के बहाने केंद्र सरकार पंजाब के अधिकारों को खत्म करने में लगी हुई है और यह एक बड़ी साजिश के तहत किया जा रहा है।
यदि सीनेट को खत्म कर दिया गया तो कॉलेजों की फीस, बच्चों की अन्य समस्याएं और हमारे कई अहम मुद्दे सामने नहीं रखे जा सकेंगे। पंजाब के कॉलेजों के सीनेट सदस्य अपनी बातें यूनिवर्सिटी के सामने नहीं रख पाएंगे और उनके समाधान नहीं करवा पाएंगे। इसीलिए उन्होंने केंद्र और भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन कर कहा कि जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है उसे वापस लिया जाए और पंजाब के अधिकारों को फिर से बहाल किया जाए।
31 अक्टूबर को जारी किए गए केंद्र सरकार के आदेश के अनुसार पंजाब यूनिवर्सिटी की 59 साल पुरानी सीनेट व सिन्डिकेट को भंग करके अब चुनाव नहीं होंगे। 31 अक्टूबर को जारी किया गया यह आदेश 5 नवंबर से लागू होगा। यह पहला मौका है जब उन संस्थाओं को पूरी तरह समाप्त किया गया है जो विश्वविद्यालय के सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय थीं, जो 1882 में स्थापित हुई थीं और 1947 के बाद चंडीगढ़ में पुनर्गठित की गई थीं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मंजूरी के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947 की धारा 20(1)(a) के तहत एक नोटिफिकेशन जारी किया। यूनिवर्सिटी का संचालन अब वाइस-चांसलर (VC) के नेतृत्व में एक बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (BoG) करेगा। इस बोर्ड में केंद्र सरकार, UGC और चंडीगढ़ प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसी के विरोध में पंजाब भर में प्रदर्शन हो रहे हैं और इसी श्रृंखला में फिरोजपुर में भी छात्र वर्ग सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
