HomeHimachalपंजाबः PRTC ने बस टर्मिनल का बढ़ाया शुल्क

पंजाबः PRTC ने बस टर्मिनल का बढ़ाया शुल्क

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चंडीगढ़ः पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के बठिंडा डिपो से निजी बस संचालकों को बस स्टैंड शुल्क बढ़ाने की सुगबुगाहट देखने को मिल रही है। पीआरटीसी ने निजी बस संचालकों को बड़ा झटका देते हुए बस टर्मिनल शुल्क बढ़ा दिया है, जिससे निजी बस मालिकों में रोष है। बस मालिकों का कहना है कि अगर पीआरटीसी ने उन्हें धमकाने की कोशिश की तो उन्हें कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।बस स्टैंड शुल्क बढ़ाने के पीछे अधिकारियों का तर्क था कि बठिंडा में स्टैंड शुल्क पंजाब के अन्य शहरों की तुलना में काफी कम था, जिसके चलते अब इसे बढ़ा दिया गया है। पीआरटीसी बठिंडा डिपो के महाप्रबंधक अमनवीर सिंह तिवाना ने कहा कि बठिंडा में दो दशक से अधिक समय से पार्किंग शुल्क में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जिसके कारण यह निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि डिप्टी कमिश्नर बठिंडा इस पूरे मामले को देख रहे हैं। वहीं निजी बस संचालकों का कहना है कि डीजल और स्पेयर पार्ट्स के दामों में बेतहाशा वृद्धि के अलावा कोरोना के बाद उनकी हालत पतली हो गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जरूरत निजी बस संचालकों को कुछ राहत देने की थी, लेकिन पीआरटीसी ने उन पर भारी बोझ डाल दिया है और निजी बस मालिकों को और भी आर्थिक संकट में फंसाने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा करने के बाद पहले से ही मिलने का संकट है और अब यह नया फैसला उनके लिए कई तरह की समस्याएं पैदा करेगा।

उन्होंने कहा कि पीआरटीसी ने इसे 30 रुपये से बढ़ाकर 90 रुपये से तीन गुना कर दिया है। उन्होंने कहा कि मिनीबस की पूरे दिन की स्टेशन फीस केवल 40 रुपये थी जिसे बढ़ाकर 45 रुपये प्रति साइकिल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर एक मिनीबस चार चक्कर लगाती है एक दिन के लिए 180 रुपये देने होंगे। यहां तक ​​कि नाईट स्लिप को भी तीन गुना कर दिया गया है जो एक नितांत गलत निर्णय है। उन्होंने कहा कि पीआरटीसी के प्रबंधकों ने निजी बस आपरेटर यूनियन को यह फैसला लेते समय भरोसे में नहीं लिया है। नेताओं ने कहा कि वे इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री से संपर्क करेंगे ताकि इस मुद्दे का उचित समाधान निकाला जा सके। निजी बस संचालक संघ के वरिष्ठ नेता सिंह ने कहा कि अगर इस मामले में न्याय नहीं मिला तो निजी बस मालिक संघर्ष का रास्ता अपनाने को विवश होंगे।

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