अमृतसरः पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान व पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू आए दिन बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में चल रही है। वहीं अब नवजोत कौर संत रामपाल के आश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम पहुंची, जहां उन्होंने मीडिया से बात की। इस दौरान नवजोत कौर सिद्धू ने राजनीति छोड़कर संतों की सेवा में शामिल होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि मैं राजनीति खत्म कर संतों की सेवा करने की सोच रही हूं। आजकल के राजनीतिक लोग अपनी पहचान भूल चुके हैं।
कार्यक्रम में 7 लड़कियों के दहेज रहित विवाह पर उन्हें बधाई देते हुए नवजोत कौर सिद्धू ने सादगीपूर्ण विवाह की परंपरा को सराहनीय बताया। डॉ. नवजोत ने कहा कि उनका अपना विवाह भी बिना दहेज और सादगी से हुआ था। उनके बच्चों के विवाह भी इसी परंपरा के अनुसार संपन्न हुए हैं। उन्होंने कहा कि समाज में दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए ऐसे प्रयास बेहद जरूरी हैं। नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि उनके अनुसार कन्यादान सबसे बड़ी सेवा है।
उन्होंने कहा कि राजनीति अब पहले जैसी नहीं रही और कई लोग अपनी मूल पहचान और सिद्धांतों को भूल चुके हैं। ऐसे में वह भक्ति और संतों की संगति में समय बिताने पर अधिक ध्यान दे रही हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में वह तीन-चार वर्षों तक संतों की संगति में रहीं, जिससे उन्हें जीवन में सेवा और समर्पण की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और राजनीतिक जीवन में भी उन्होंने संतों से मिली प्रेरणा के आधार पर ही कार्य किया। कैंसर से जंग जीतने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक नया जीवन है।
उन्होंने इसे ईश्वर की कृपा बताया और कहा कि अब वह आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना चाहती हैं। इस अवसर पर उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने पति नवजोत सिंह सिद्धू के साथ मिलकर अपने पूरे शरीर का दान करने का संकल्प लिया है, ताकि मृत्यु के बाद उनके अंग जरूरतमंद लोगों के काम आ सकें। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह सेवा और भक्ति पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहतीं।