अमृतसरः गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब बाबा दीप सिंह जी में कथित रूप से पैसों के नोटों का “खजाना” बांटे जाने का मामला गरमा गया है। इस मामले को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब के जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने एक्शन लिया है। जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने स्पष्ट कहा कि ‘सेवक जत्था इशनान’ समूह के नाम पर और ‘खजाना बाबा दीप सिंह जी’ की मोहर लगाकर नोट बांटना पूरी तरह गलत और गुरमत के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि गुरु घर में इस तरह की गतिविधियों की कोई परंपरा नहीं है और यह संगत को गुमराह करने का प्रयास है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को मनमत्त और गुरमत विरोधी करार देते हुए गुरुद्वारा प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
उन्होंने इसे सिख धर्म की मर्यादा के खिलाफ बताया। श्री अकाल तख्त साहिब के जथेदार ने गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब के मैनेजर जतिंदरपाल सिंह को निर्देश दिए हैं कि नोट बांटने वाले व्यक्तियों की पहचान कर पूरा मामला लिखित रूप में तैयार किया जाए और रिपोर्ट उन्हें भेजी जाए। संकेत दिए गए हैं कि रिपोर्ट मिलने के बाद मनमत्त गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। मैनेजर द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लछमनसर चौक के पास बाबा दीप सिंह जी के नाम से जुड़े एक छोटे स्थान पर पहले भी इस तरह के नोट बांटे जाते थे और अब यह गतिविधि गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब की ओर बढ़ गई थी।
मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले यह मामला सामने आया था कि कुछ बाहरी लोग शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधीन गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब परिसर में मोहर लगे नोटों को “खजाना” बताकर बांट रहे थे। जब यह बात गुरुद्वारा प्रबंधन के संज्ञान में आई तो तत्काल कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों की पहचान की गई और नोट भी जब्त किए गए। दरअसल, इस मामले को लेकर गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब बाबा दीप सिंह जी के ग्रंथी सिंह ज्ञानी दया सिंह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि गुरु घर की ओर से किसी को भी पैसों का कोई खजाना नहीं दिया जाता।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग निजी लाभ के लिए सोशल मीडिया पेजों और चैनलों के माध्यम से ऐसी अफवाहें फैलाते हैं। गुरुद्वारा प्रबंधन और धार्मिक नेताओं ने संगत से अपील की है कि वे ऐसे मनमत्त लोगों के झांसे में न आएं। गुरु घर से मिलने वाला सच्चा खजाना नाम, गुरबाणी, सेवा, सिमरन और मानवता की भलाई है, न कि पैसों के नोट। यदि ऐसी कोई गतिविधि कहीं दिखाई दे तो तुरंत गुरुद्वारा प्रबंधन को सूचित किया जाए।
