अमृतसर: श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार और सचखंड श्री हरिमंदर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह जी ने शिरोमणि अकाली दल के पूर्व प्रधान सुखबीर सिंह बादल द्वारा दिए गए ताज़ा बयान पर कड़ा विरोध जताया है। ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल द्वारा 2 दिसंबर 2024 को सुनाई गई धार्मिक तनख़ाह (सेवा) को ‘साज़िश’ कह देना श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादाओं और पंथिक परंपराओं की गम्भीर उल्लंघना है। जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि 2 दिसंबर का फ़ैसला किसी निजी रंजिश के तहत नहीं, बल्कि समूची अकाली नेतृत्व द्वारा संगत की अदालत में खुद कबूल किए गए गुनाहों के आधार पर लिया गया था।
उन्होंने कहा कि उस दिन सारी नेतृत्व ने माइक पकड़कर संगत के सामने अपनी गलतियां मानीं और निर्धारित सेवा भी निभाई थी। पर अब सेवा पूरी होने के बाद अपने बयानों से मुकर जाना और इसे साज़िश बताना दुर्भाग्यपूर्ण है। ज्ञानी रघवीर सिंह ने सुखबीर सिंह बादल को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह कोई भी दिन मुकर्रर कर लें और अपने परिवार सहित श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश हों। वहां गुरु साहिब के प्रकाश और पंज सिंह साहिबान की हाज़िरी में वे यह साबित करें कि यह फ़ैसला किसी साज़िश का हिस्सा था।
पूर्व जत्थेदार ने भावुकता से कहा कि यदि यह साज़िश साबित होती है, तो पंथ जो भी सज़ा उन (सिंघ साहिबान) को देगा, वे स्वीकार करेंगे। उन्होंने अंत में दोहराया कि श्री अकाल तख्त साहिब का फ़ैसला पंथिक भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है और उस पर उंगली उठाना सिख सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है। अब जवाब सुखबीर सिंह बादल के पास है कि वे गुरु की हाज़िरी में आकर अपने दावों को सच्चा साबित करें। रघुबीर सिंह ने जोर देकर कहा कि श्री तख्त साहिब के आदेश और परंपरा का उल्लंघन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।