अमृतसरः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जेलों से हो रही नशा तस्करी के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस को निर्देश जारी किए थे। वहीं जेल में बढ़ रहे नशा तस्करी के मामलों को लेकर पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। दरअसल, इस मामले में अमृतसर देहाती एसएसपी मनिंदर सिंह को जांच करने की हाईकोर्ट की ओर से पूरी जिम्मेदारी दी गई थी, जिसमें एसएसपी की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अदालत ने साफ निर्देश दिए थे कि एसएसपी स्वयं जांच फाइल की समीक्षा करें और यह स्पष्ट करें कि जेल अधिकारियों को अब तक आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।
हालांकि, एसएसपी ने यह जिम्मेदारी एक डीएसपी को सौंप दी थी, जिसे कोर्ट ने अवमानना के समान आचरण करार दिया। 14 मई के आदेश के तहत एसएसपी मनिंदर सिंह ने कोर्ट में पेश होकर बिना शर्त माफी मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। एसएसपी अब खुद इस मामले की जांच करेंगे कि किन जेल अधिकारियों का नशा तस्करी में शामिल होना है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जेलों से नशा तस्करी बिना जेल और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं हो सकती। ऐसे में अब बनी समितियों से हर केस की निष्पक्ष और गहन जांच की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं हाईकोर्ट ने जेलों से हो रही नशा तस्करी के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेशभर में विशेष जांच समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने पंजाब के डीजीपी गौरव यादव से कहा था कि वह एनडीपीएस एक्ट के तहत जेलों से जुड़े सभी मामलों की जांच के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करें। वहीं डीजीपी के आदेश के तहत अब रेंज स्तर पर एडीजीपी, आईजीपी डीआईजी और कमिश्नरेट स्तर पर पुलिस कमिश्नर की अध्यक्षता में जांच समितियां गठित की। इन समितियों की जांच प्रक्रिया की निगरानी आईपीएस अधिकारी और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के एडीजीपी निलाभ किशोर करेंगे।