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Punjab News: श्रद्धालुओं से 200 रुपए फीस का SGPC ने किया विरोध, केंद्र पर साधे निशाने, देखें वीडियो

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बलवंत सिंह राजोआना के पत्र से हलचल तेज, श्री अकाल तख्त साहिब पर टिकी नजरें

अमृतसरः पटियाला जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआना द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को लिखे पत्र के बाद सिख राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हरजींदर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पूरी तरह श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का पालन करेगी। धामी ने बताया कि राजोआना द्वारा भेजा गया पत्र जत्थेदार साहिब तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि राजोआना की फांसी की सजा के खिलाफ दायर मर्सी पिटिशन भी उस समय के जत्थेदार और सिख साहिबान के आदेशों पर ही आधारित थी।

अब राजोआना की रिहाई या मर्सी पिटिशन वापिस लेने के संबंध में जो भी फैसला अकाल तख्त साहिब द्वारा लिया जाएगा, SGPC उस पर तुरंत अमल करेगी। उन्होंने कहा कि यह मामला सिख समुदाय की भावनाओं से जुड़ा हुआ है और सर्वोच्च पंथक संस्था द्वारा जारी किए जाने वाले हर फैसले को पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाएगा। फिलहाल सबकी नज़रें जत्थेदार साहिब के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। इसके साथ ही SGPC ने पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए 200 रुपये की फीस पर भी सख्त ऐतराज जताया है।

धामी ने कहा कि अटारी बॉर्डर और करतारपुर साहिब मार्ग से जाने वाली सगत से यह वसुली करना आस्था पर चोट है। उन्होंने कहा कि बैसाखी, गुरु अर्जुन देव जी की शहादत की वर्षगांठ, महाराजा रणजीत सिंह की बरसी और गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के मौकों पर हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु पाकिस्तान जाते हैं। पहले से ही करतारपुर साहिब पर पाकिस्तान सरकार द्वारा 20 डॉलर की फीस ली जाती है, जिससे श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

ऐसे में भारत सरकार द्वारा लगाया गया यह नया 200 रुपये का टैक्स और मुश्किलें खड़ी करता है। धामी ने केंद्र सरकार से अपील की कि धार्मिक यात्रा को कराधान के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस फीस को तुरंत वापस लिया जाए और पाकिस्तान जाने के लिए पासपोर्ट की शर्त को भी आसान बनाया जाए, ताकि श्रद्धालु बिना रोक-टोक दर्शन कर सकें। SGPC ने दोनों मामलों पर अपना स्टैंड स्पष्ट करते हुए कहा है कि चाहे राजोआना का मामला हो या श्रद्धालुओं की यात्रा, पंथिक हित सर्वोपरि हैं और इससे समझौता नहीं किया जाएगा।

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