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Punjab News: खुद को DSP बताकर नोएडा की कंपनी में की Raid, ASI और हैंड कांस्टेबल सहित 6 गिरफ्तार

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3 कारोबारियों को अगवा कर मांगे 10 करोड़

लुधियानाः नोएडा में एक कंपनी के पुलिस कर्मियों ने कुछ व्यक्तियों के साथ मिलकर फर्जी रेड की। इस दौरान कर्मियों ने खुद को पुलिस के सीनियर अधिकारी बताकर 3 कारोबारियों को गिरफ्तार किया। जहां उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ चंडीगढ़ में शिकायत दर्ज हुई है। ऐसे में वह उन्हें गिरफ्तार करके चंडीगढ़ ले जा रहे है।

बताया जा रहा है कि पुलिस कर्मियों सहित अन्य व्यक्ति तीनों कारोबारियों को चंडीगढ़ की जगह लुधियाना के जमीनदारा ढाबे पर ले गए, जहां उन्होंने तीनों को अगवा करके उनके परिजनों से 10 करोड़ रुपए की मांग की। इस घटना में गगन नामक व्यक्ति ने खुद को डीएसपी बताया था।

वहीं खन्ना के एसआई साइबर क्राइम को घटना की सूचना मिली तो एसआई की जांच में सामने आया कि यह फर्जी रेड की गई है। जिसके बाद साइबर क्राइम के एएसआई शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लुधियाना के एएसआई कुलदीप सिंह, हैंड कांस्टेबल बलविंदर सिंह, गगन सहित 6 के खिलाफ मामला दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में खन्ना के साइबर क्राइम के एसआई ने ही पुलिस की फर्जी रेड का पर्दाफाश किया है।

बता दें कि इस केस में बाद में रकम 5 करोड़ रुपये की गई और फिर इसे 70 लाख रुपये तक कम कर दिया गया। पीड़ितों के खातों से 999 USDT, 3650 USDT और 1 लाख रुपये गिफ्ट कार्डों के जरिए ले लिए गए। इसके अलावा ऐप्पल फोन, पोको फोन और ऐप्पल वॉच भी जब्त किए गए हैं। आरोपियों ने अगवा किए बिजनेसमैन को खन्ना पुलिस के सामने ला कर झूठा मामला दर्ज कराने का प्रयास किया। लेकिन जब थाना इंचार्ज नरपिंदर सिंह ने जांच की, तो पता चला कि इन पीड़िताओं के खिलाफ न कोई शिकायत है और न ही कोई केस रिकॉर्ड में दर्ज है। इससे सारी साजिश का पर्दाफाश हो गया।

एचसी बलविंदर सिंह, एएसआई कुलदीप सिंह, गगनदीप एपल, करणदीप सिंह, मनी और एक अनजान साथी के खिलाफ मामला 319, 140, 3(5), 318 (4) बीएनएस और 66-डीआईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। खन्ना पुलिस ने 17 सितंबर को यह केस दर्ज किया। लेकिन इसकी जड़ें राजनीतिक और पुलिस महकमे से जुड़ी होने के कारण अभी तक इस मामले को मीडिया से छुपाकर रखा गया है। अब इसकी एफआईआर सामने आई है।

इस का पर्दाफाश होने पर पुलिस महकमे की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि जालसाजी करने वाले समूह में पुलिस के कर्मचारी भी शामिल थे। दूसरी तरफ, गगनदीप एपल का राजनीतिक पार्टी से संबंध होने के कारण यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

 

 

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