अमृतसरः एक ओर पंजाब सरकार वसनीकों के इलाज के लिए 10 लाख तक के हेल्थ कार्ड बनवा रही है ताकि लोग अपना सही इलाज करवा सकें, दूसरी ओर कुछ अस्पतालों में इन कार्डों को लिमिटेड तौर पर चलाया जा रहा है, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण अमृतसर से सामने आया है, जहां अमृतसर के मकबूपुरा इलाके में पलस अस्पताल में उस समय तनाव पैदा हो गया जब एक गरीब परिवार ने अपने बीमार बच्चे का इलाज सरकार द्वारा जारी 10 लाख के हेल्थ कार्ड पर करवाने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इलाज से इनकार कर दिया। पीड़ित परिवार ने कहा कि अस्पताल ने पहले 3500 रुपए फीस और अन्य खर्च की मांग की। परिवार का कहना है कि वे कई वर्षों से अपने बच्चे का इलाज विभिन्न अस्पतालों में करवा रहे हैं और अब उनके पास पैसे की कमी है।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दिया गया कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने इलाज करने से इनकार कर दिया, जिससे वे बहुत परेशान हुए। इस दौरान स्थानीय आम आदमी पार्टी के नेता और काउंसिलर कमल कुमार और अन्य आप के नेता मौके पर पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के साथ तीखी बहस हुई। उन्होंने कहा कि कुछ निजी अस्पताल सरकार की योजनाओं को लागू नहीं कर रहे हैं और गरीब लोगों से पैसे वसूली कर रहे हैं, जिससे सरकार की छवि खराब हो रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हल्का पूर्वी से विधायक जीवनजोत कौर भी मौके पर पहुंचीं।
उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से गलतफहमी का मामला था। उन्होंने अस्पतालों से विनम्रता से आग्रह किया कि मरीजों के साथ प्यार से पेश आएं और यदि इलाज वहां संभव न हो तो सही दिशा दिखाएं। जीवनजोत कौर ने कहा कि कुछ बीमारियों का इलाज या सुविधाएं हर अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, जिस कारण मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाएगी और बच्चे का इलाज ठीक ढंग से करवा दिया जाएगा। वहीं अस्पताल डायरेक्टर डॉ. ऋषभ ने कहा कि मरीज की बीमारी स्कीम के तहत कवर नहीं थी और इसी कारण गलतफहमी बन गई। उन्होंने बताया कि मरीज को अब हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है ताकि उसका बेहतर इलाज हो सके और मामला सलाह-मशवरे से सुलझा लिया गया है और मरीज को आगे इलाज के लिए भेज दिया गया है।