मोहालीः शहर के नामवार मैक्स अस्पताल में अजीब मामला सामने आया है जहां, इलाज दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई। पीड़ितों ने अस्पताल को 38 दिनों में करीब 35 लाख रुपए जमा करवा दिए, लेकिन अस्पताल ने अंत में उनका बिल 45 लाख के करीब बनाया। बकाया जमा करने में असमर्थ होने के चलते मैक्स अस्पताल ने परिजनों को शव देने से इंकार कर दिया जिसके बाद मामला पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन के पास पहुंचा। फिर कमीशन ने अस्पताल के इस रवेया को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए फटकार लगाई।
जानकारी मुताबिक, फेज-6 स्थित मैक्स अस्पताल में नाभा के रहने वाले एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों ने 35.26 लाख रुपए जमा कर दिए थे जबकि अस्पताल ने 40.18 लाख रुपए का बिल बनाया था। जब परिजन शव लेने के लिए गए तो अस्पताल प्रबंधन ने बाकी बचे रुपए जमा कराने के लिए कहा। उन्होंने शव देने की गुहार लगाई, लेकिन अस्पताल ने उनकी एक नहीं सुनी जिसके बाद उन्होंने ह्यूमन राइट्स कमीशन में इसकी शिकायत दी।
मैक्स अस्पताल के वकील और सिविल सर्जन दफ्तर से मेडिकल अधिकारी कमीशन की सुनवाई में पहुंचे थे। मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमिशन के मेंबर जीतेन्द्र सिंह शंटी ने कहा कि मैक्स के डायरेक्टर और सिविल सर्जन सुनवाई में क्यों नहीं पहुंचे ? वहीं उन्होंने कहा कि मैक्स अस्पताल ने मरीज की मौत के बाद तुरंत परिजनों को बॉडी नहीं दी। साथ ही इतना ज्यादा बिल बना दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन के हिसाब से लाखों रुपए लेने के बारे में क्या उन्होंने परिजनों से पहले कान्ट्रैक्टर किया था?
उन्होंने कहा कि यह मामला काफी गंभीर है और इसको गंभीरता से ही लेना चाहिए था। इसके बाद उन्होंने पूछा कि सिविल सर्जन दफ्तर की तरफ से अस्पताल के ऊपर कोई एक्शन लिया गया है? अगर हेल्थ डिपार्टमेंट के लोग अच्छे से जवाब नहीं देंगे तो अस्पताल के साथ-साथ उनपर भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद अब अगली सुनवाई 20 जनवरी की रखी गई है।