पांडवों ने बिताया था अज्ञातवास
पठानकोटः भगवान शिव का विवाह जिसे शिवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और इस बार यह पर्व 26 फरवरी को मनाया जा रहा है। वहीं पठानकोट जिले के अलग-अलग इलाकों में यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा जिसके चलते कई जगहों पर झांकियां भी लगाई गई। आपको बता दें कि पठानकोट जिले में एक इलाका ऐसा भी है जहां पर 5500 साल पुराना शिव मंदिर है जिसे मुक्तेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है।
इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान किया था और आज भी पांडवों द्वारा बनाई गई 5 गुफाओं में से 3 गुफाएं यहां पर मौजूद हैं और इसके साथ ही पांडवों द्वारा बनाया गया शिव मंदिर आज भी लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। मंदिर में युधिष्ठिर द्वारा जलाया गया अखंड धूना आज भी दर्शनीय है। कहा जाता है कि इस स्थान पर एक गुप्त गुफा थी जो हरिद्वार में हरि के घाट तक जाती थी, जिसे सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था।
मंदिर में माथा टेकने आए लोगों ने बताया कि इस मंदिर में सदियों पुराना इतिहास छिपा हुआ है, यही वजह है कि यह लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन गया है। सुनील कुमार ने बताया कि उनकी इस मंदिर से आस्था जुड़ी हुई है। वह मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन करके प्रसंन हो जाते हैं। वहीं मीरथल से आए राकेश कुमार ने बताया कि मंदिर में शिवरात्रि पर भारी भीड़ देखी जाती है।
उन्होंने कहा कि आज वह मंदिर में माथा टेकने आए हैं क्योंकि आज भीड़ कम होती है। रमन कुमार ने बताया कि वह हर साल मंदिर में माथा टेकने आते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में शिवरात्रि के दिन काफी भीड़ होती है। लोग रात को ही लाइनों में मंदिर में माथा टेकने के लिए आ जाते हैं। इसलिए वह एक दिन पहले ही माथा टेकने आ गए हैं।