चंडीगढ़ः राज्य में मान सरकार एक्शन मोड पर आ गई है। दरअसल, अब मान सरकार ने तहसीलों में जमीन और संपत्ति के पंजीकरण के लिए रिश्वतखोरी के जाल को तोड़ने के लिए राजस्व विभाग ने अब रजिस्ट्री क्लर्कों को उनके पदों से हटाने का आदेश दिया है। इस दौरान कहा गया है कि नवनियुक्त कर्मचारियों को रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार आदि के पास पंजीकरण कराने का काम सौंपा जाए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि वर्तमान में पंजाब भर में तैनात रजिस्ट्री क्लर्कों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए और उनके स्थान पर रजिस्ट्रार या संयुक्त उप-रजिस्ट्रार की सहायता के लिए 7 वर्ष से कम कार्य अनुभव वाले क्लर्क नियुक्त किए जाएं। निर्देशों के अनुसार, मोहाली (एसएएस नगर) में चल रही ‘ईज़ी रजिस्ट्री पायलट परियोजना’ को अब राज्य भर में लागू किया जा रहा है ताकि रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाया जा सके। इस संबंध में राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने सभी जिलों के उपायुक्तों को एक पत्र भेजा है।
जिसमें न केवल ईजी रजिस्ट्री परियोजना की प्रक्रिया के बारे में बताया गया है, बल्कि रजिस्ट्री क्लर्क, रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार के कार्यों में बदलाव के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। जानकारी के अनुसार, ‘ईज़ी रजिस्ट्री’ के तहत अब पंजीकरण से पहले रजिस्ट्रार या संयुक्त उप-रजिस्ट्रार को अपने लॉगिन से दस्तावेजों की जांच करनी होगी कि वे कानूनी रूप से सही हैं या नहीं, साथ ही साथ स्टांप शुल्क और अन्य सरकारी शुल्क की गणना सही तरीके से की गई है या नहीं। सब कुछ सही पाए जाने पर ही पंजीयक या संयुक्त उप-पंजीयक द्वारा रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। रजिस्ट्री के समय, दोनों पक्षों की पहचान, उनकी पात्रता और सरकारी शुल्क और स्टांप शुल्क के भुगतान की पूरी तरह से जांच की जाएगी।
इसके अलावा, रजिस्ट्रार और संयुक्त उप-रजिस्ट्रार की सहायता के लिए क्लर्क भी नियुक्त किए जाएंगे। इन क्लर्कों का कार्य सभी अदालती आदेशों को पोर्टल पर अपलोड करना, संबंधित पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज प्राप्त करना, रजिस्ट्री को स्कैन करना और इसे रजिस्टर में दर्ज करना और एक घंटे के भीतर संबंधित पक्ष को रजिस्ट्री की प्रति सौंपना होगा। दक्षता सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह भी निर्णय लिया गया है कि राज्य भर में तैनात सभी रजिस्ट्री क्लर्कों को बदल दिया जाएगा ताकि भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।
रजिस्ट्री से संबंधित सहायता प्रदान करने वाले क्लर्कों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि उपायुक्तों के साथ हुई बैठकों में यह बात सामने आई है कि जिला स्तर पर केवल 10-15% कर्मचारी ही रजिस्ट्री क्लर्क की परीक्षा पास कर पाए हैं, जिससे उन्हीं कर्मचारियों को बार-बार रजिस्ट्री क्लर्क की ड्यूटी पर लगाया जाता है और भ्रष्टाचार की आशंका रहती है।