अमृतसरः श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम को एक केस में बरी किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि पूरा सिख पंथ लंबे समय से बंदी सिखों के मामले उठाता आ रहा है, लेकिन इस मामले में अभी तक कोई ठोस हल नहीं निकला। जत्थेदार साहिब ने कहा कि भाई दविंदरपाल सिंह भुल्लर के मामले को जब आगे बढ़ाया गया तो उसे रद्द कर दिया गया।
इसके अलावा कई और बंदी सिख, जैसे कि भाई बलवंत सिंह राजोआणा शामिल हैं, उनके मामले भी वर्षों से लटके हुए हैं। उन्होंने बताया कि भाई राजोआणा की फांसी को आजीवन कारावास में बदलने का मामला भी अभी तक पूरी तरह नहीं सुलझा। उन्होंने कहा कि कई बंदी सिंग्ख 30–35 साल से जेलों में बंद हैं और उनके मामलों में कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई।
ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹੋ:
ਪੱਤਰਕਾਰ ਕਤਲ ਮਾਮਲੇ ’ਚ ਡੇਰਾ ਮੁਖੀ ਰਾਮ ਰਹੀਮ ਨੂੰ ਬਰੀ ਕਰਨ ’ਤੇ ਜਥੇਦਾਰ ਗੜਗੱਜ ਦਾ ਤਿੱਖਾ ਪ੍ਰਤੀਕਰਮ
दूसरी ओर, जहां किसी व्यक्ति पर लगे दोष साबित भी हो चुके हैं, वहां उसे बहुत जल्दी बरी कर दिया जाना न्याय प्रणाली पर सवाल उठाता है। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि ऐसे फैसले उन लोगों के लिए निराशाजनक होते हैं जो न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर न्याय के लिए संघर्ष करने वालों को ही न्याय नहीं मिलता तो वे फिर किस ओर जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है, ताकि न्याय प्रणाली पर लोगों का भरोसा बना रहे और बंदी सिखों के मामलों का भी जल्द और न्यायसंगत समाधान निकल सके।