अमृतसरः सचखंड श्री दरबार साहिब की परिक्रमा में से 30 जनवरी 2026 को 2 नौजवानों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने का मामला गरमाया हुआ है। इस मामले को लेकर एसजीपीसी ने कड़ा रोष व्यक्त किया था और आरोप लगाया था कि पवित्र परिसर के अंदर ऐसी कार्रवाई अनुचित है। इस मामले के संबंध में SSP फाजिल्का गुरमीत सिंह अकाल तख्त साहिब पहुंचे, जहां उनके साथ अमृतसर के पुलिस कमिश्नर भुल्लर भी मौजूद थे। हालांकि मीडिया कवरेज पर पाबंदी के कारण पत्रकारों को खुलकर बात करने का मौका नहीं मिला।
जब पत्रकारों ने SSP फाजिल्का से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि वे सचखंड श्री दरबार साहिब माथा टेकने और जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज से मुलाकात के लिए आए हैं। इसके अलावा उन्होंने मीडिया के साथ कोई विस्तार से जानकारी साझा नहीं की। याद रहे कि 30 जनवरी को जब पुलिस ने परिक्रमा से 2 नौजवानों को हिरासत में लिया था, तब एसजीपीसी की टास्क फोर्स ने पुलिस कर्मचारियों को रोका था और लगभग आधे घंटे तक पूछताछ की गई थी। बाद में उन्हें जाने दिया गया था।
दूसरी ओर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि सचखंड श्री दरबार साहिब सर्व साझा स्थान है, जहाँ हर धर्म और वर्ग के लोग श्रद्धा से आते हैं। उन्होंने कहा कि पवित्र परिसर में ऐसी कोई भी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जिससे गलत संदेश जाए। उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा है और भरोसा दिया है कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। जत्थेदार ने यह भी कहा कि इस संबंध में लिखित रूप में भी पक्ष रखने को कहा गया है।
इस मौके पर जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने प्रोफेसर दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई के मामले पर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रो. भुल्लर अपनी सज़ा पूरी कर चुके हैं और मानवता के आधार पर उनकी रिहाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यह मामला दिल्ली सरकार के अधीन है और सरकार को सिख भावनाओं का सम्मान करते हुए फ़ाइल पर तुरंत फैसला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिख कौम ने देश की आज़ादी से लेकर मुश्किलों के समय तक हमेशा बड़ा योगदान दिया है, इसलिए मानवता के नज़रिए से इस मामले पर विचार ज़रूरी है।
