अमृतसरः श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज्ज आज श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे। इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून का राज होता है और यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है तो कानून के अनुसार उसकी जांच और सज़ा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में कोई भी कितनी भी ताकत रखता हो, वह जांच से बच नहीं सकता। ज्ञानी गढ़गज्ज ने कहा कि सीबीआई द्वारा की गई जांच और हालिया कार्रवाई को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कुछ मामले शिरोमणी गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी से संबंधित हैं, जहां संदेश भेजे गए थे, लेकिन अकाल तख्त साहिब के आदेशों की पालना नहीं की गई। उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह के दौरान जिन गतिविधियों को टालने के लिए कहा गया था, वे फिर भी की गईं, जिसकी वजह से कार्रवाई अनिवार्य बन गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदा देने या पत्र छोड़कर जाने के बारे में फैली बातें गलत हैं।
दिल्ली मिशन के इंचार्ज द्वारा सदा सही तरीके से दिया गया था और बाद में दिल्ली कमेटी के सदस्य ही वह सदा लेकर गए। ज्ञानी गढ़गज्ज ने कहा कि जो भी आरोप लगाए गए हैं। चाहे वे जमीनों से संबंधित हों या अन्य मामले हो, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से संबंधित मामलों में बनाई गई जांच टीमों के बारे में भी बात की और कहा कि एसआईटी के सदस्य अमृतधारी होने चाहिएं, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर धार्मिक मर्यादा से जुड़ा हुआ है।
कीर्तन की मर्यादा के बारे में कहा कि सिख रहित मर्यादा के अनुसार गुरबाणी का कीर्तन पूरी आध्यात्मिक शांति और अनुशासन के साथ होना चाहिए। कीर्तन के दौरान शोर-शराबा, नारे या ऊंची आवाज़ें करना गलत है और यह मर्यादा के विपरीत है। यदि इस तरह की कोई शिकायत मिलती है, तो संबंधित पक्ष को समझाया जाएगा। ज्ञानी गढ़गज्ज ने कहा कि संगतों को गुरुगृहों में मर्यादा का पालन करना चाहिए और खालसा जैसी भव्यता के साथ, गुरु के प्रति समर्पित होकर, परंपरागत तरीके से धार्मिक कार्यक्रम मनाने चाहिए।