गांव में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया अंतिम संस्कार
बरनाला। कनाडा में पढ़ाई और बेहतर भविष्य की तलाश में गए पंजाबी युवाओं की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन किसी न किसी गांव से दुखद खबर सामने आ रही है। वहीं, ताजा मामला बरनाला जिले के हलका महल के गांव गुरम का आया है। 23 वर्षीय युवक राजप्रीत सिंह की कनाडा में बीमारी के चलते मौत हो गई। जैसे ही आज उसकी पार्थिव देह गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
माता-पिता का इकलौता सहारा था राजप्रीत सिंह
राजप्रीत सिंह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता कुलवंत सिंह, जो पेशे से एक प्राइवेट बस ड्राइवर हैं, ने अपने बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी करीब 2 एकड़ जमीन पर लोन लेकर और कर्ज़ उठाकर बेटे को विदेश भेजा।
बेटे की पढ़ाई के लिए खर्च किए 23 लाख रुपए
परिवार ने बताया कि राजप्रीत सिंह को ढाई साल पहले पढ़ाई के लिए कनाडा के ब्रैम्पटन भेजा गया था। उसकी पढ़ाई और विदेश भेजने पर पिता ने करीब 23 लाख रुपए खर्च किए थे। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा पढ़-लिखकर परिवार की हालत सुधारेगा।
अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान हुई थी मौत
परिजनों के अनुसार, राजपूत को कुछ दिन पहले अचानक पेट में तेज दर्द हुआ था। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान 17 जनवरी को उसकी मौत हो गई। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
शव भारत लाने के लिए फिर लेना पड़ा कर्ज़
दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। बेटे की मृतक देह को कनाडा से पंजाब लाने के लिए भी पिता को करीब 9.50 लाख रुपए का कर्ज़ लेना पड़ा। एक तरफ बेटे को खोने का ग़म, दूसरी तरफ भारी कर्ज-परिवार पूरी तरह टूट गया है।
पृतक गांव में किया गया अंतिम संस्कार
आज गांव गुरम में राजप्रीत सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पूरे गांव में मातम पसरा रहा। हर आंख नम थी और हर दिल दुख से भरा हुआ था।
मां से रोज बात करने का वादा अधूरा रह गया
अंतिम संस्कार के मौके पर रोते-बिलखते माता-पिता ने बताया कि राजप्रीत सिंह ने कनाडा जाते समय वादा किया था कि वह रोज सुबह-शाम अपनी मां से फोन पर बात करेगा। लेकिन किसे पता था कि यह वादा अधूरा ही रह जाएगा।
पीड़ित परिवार ने पंजाब सरकार से की मांग
पीड़ित परिवार ने पंजाब सरकार से अपील की है कि उन पर चढ़ा सारा कर्ज़ माफ किया जाए, और परिवार को आर्थिक मदद दी जाए, ताकि वे इस मुश्किल समय में अपना जीवन किसी तरह चला सकें।
