लुधियानाः पंजाब में आई बाढ़ का असर सब्जियों पर भी पड़ा है। दरअसल, पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश और पंजाब में बाढ़ से फसलें ख्रराब होने के कारण हरे मटर, फूलगोभी, टमाटर और अन्य सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। शहर की होलसेल मंडियों में हरे मटर की कीमत 180 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि खुदरा बाजारों में यह और भी महंगी बिक रही है। फूलगोभी जो सामान्य दिनों में 25-30 रुपये प्रति किलो मिलती थी, अब 40-50 रुपये प्रति किलो बिक रही है। आढ़ती लक्की ने बताया कि पहले मंडियों में सब्जियां नहीं पहुंची, लेकिन अभी साफ सब्जियां नहीं मिल रही है। उन्होेंने कहा कि इस समय बाढ़ की मार से 5 से 6 गुणा सब्जियों के दाम बढ़ गए है।
जैसे कि शिमला मिर्च एक सप्ताह में 70 रुपए किलो थी और आज 120 रुपए तक दाम पहुंच गए है। फलिया 170 रुपए किलो, फूलगोभी 100 से अधिक दाम बिक रहे है। पुदीना, धनिया, पालक सब खेत खत्म ही हो गए। हिमाचल में रास्ते टूटने से मटर की काफी दिक्कत आ रही है। हिमाचल प्रदेश से सब्जियों की आपूर्ति बाधित होने से बाजार में कमी आ गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए राजस्थान और अन्य दूरदराज के राज्यों से सब्जियां मंगानी पड़ रही हैं, जिससे ट्रांसपोर्टेशन लागत काफी बढ़ गई है।
मंडी के हालात यह हो गए है, मार्किट में कोई ग्राहक नहीं आता। क्योंकि पीछे से सब्जियां ही नहीं आ रही है। इसी तरह फलों पर इसकी मार देखने को मिली है। ऐसे में फलों के दामों में भी काफी बढ़ौतरी हुई है। आढ़ती ने बताया कि 60 से 70 रुपए बिकने वाला अनार 200 रुपए तक पहुंच गया है। पंजाब में आई बाढ़ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव आने वाले दो महीनों में देखने को मिलेगा। सामान्य तौर पर इसी मौसम में पंजाब में मटर, गाजर और आलू की बुवाई होती है। इसकी फसल करीब दो महीने बाद मंडियों में आने लगती है लेकिन इस बार बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है।
जानकारों का मानना है कि जब तक हिमाचल प्रदेश से सब्जियों की आपूर्ति सामान्य नहीं होती और पंजाब से नई फसल मंडियों में नहीं आती, तब तक सब्जियों की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। सब्जियों की बढ़ती कीमत केवल मटर और गोभी तक सीमित नहीं है। होलसेल मार्केट में 35-40 रुपये प्रति किलो बिकने वाला टमाटर खुदरा बाजार में 80 रुपये तक पहुंच गया है। एक महीने पहले 40 रुपये किलो बिकने वाली भिंडी और परवल अब 70 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं, जबकि बैगन की कीमत भी 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।