मोहालीः पंजाब सरकार ने डीआईजी इंदरबीर सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला चलाने की मंजूरी दे दी है। ये दोनों केस 2022 में तरनतारण में दर्ज किए गए थे और इन के चालान जिला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में पेश हो चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जल्द ही अदालत की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है। इस मामले में पंजाब पुलिस के डीएसपी लखबीर सिंह संधू सरकारी गवाह बन गए हैं। इंदरबीर सिंह इस समय पीएपी में तैनात हैं।
केस की शुरुआत उस वक्त हुई थी जब 2022 में सीआईए स्टाफ पट्टी के तत्कालीन इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर बलजींदर सिंह बाजवा ने तरनतारण के एसएसपी को हलफनामा देकर आरोप लगाया था कि डीएसपी लखबीर सिंह संधू ने एनडीपीएस एक्ट में फंसा कर लगभग 23 लाख रुपए वसूल किए थे। इस दौरान डीआईजी इंदरबीर सिंह के रीडर का नाम भी सामने आया, जिसने कथित तौर पर बताया था कि यह रकम डीआईजी तक पहुंचाई जानी है। मामले की गंभीरता के मद्देनजर जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंपी गई है। एक और केस में, 2022 में भिखीविंड थाने में 900 ग्राम अफीम जब्त के बदले तस्कर से लगभग 12 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी।
इस मामले में भी लगभग 10 लाख रुपए की बरामदगी हुई थी और डीएसपी लखबीर सिंह संधू का नाम सामने आया था। बाद में गिरफ्तार किए गए लखबीर सिंह संधु ने सरकारी गवाह बनते हुए खुलासा किया कि यह सारा पैसा डीआईजी इंदरबीर सिंह के इशारे पर लिया जाता था। वह मूल रूप से तरनतारण के गांव बूह का वासनीक है और इस वक्त बटाला में रहता है। लखबीर के वकील मुताबिक, सरकार ने दोनों केसों में भिखीविंड और पट्टी थाने में दर्ज एफआईआर में मामला चलाने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, मुअत्तल डीएसपी लखबीर सिंह संधू को फिर बहाल कर दिया गया है और वह अब दोनों मामलों में सरकारी गवाह के रूप में अदालत में पेश होगा।