चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को बिना उपयुक्त कारण सीनीयर पुलिस अधिकारियों को डिफेंसेस गवाह के रूप में समन करने की परंपरा पर सख्त रुख अपनाते हुए जालंधर अदालत द्वारा एनडीपीएस केस में लुधियाना के कमिश्नर ऑफ पुलिस स्वपन शर्मा को समन करने के आदेश पर स्टे लगा दिया। ऐसे में सीपी को हाईकोर्ट से राहत मिली है। यह मामला माननीय जज जसजीत सिंह बेदी द्वारा सुनाया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी पैदा करने के लिए सीनियर अधिकारियों को अदालतों में घसीटना अन्यायपूर्ण प्रक्रिया का गलत प्रयोग है, जो खासकर समय-बद्ध एनडीपीएस ट्रायलों में कहीं मंज़ूर नहीं।
सुनवाई के दौरान बेंच ने खुली अदालत में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि लुधियाना के कमिश्नर ऑफ पुलिस को अदालत में बुलाने की आखिर जरूरत क्या है? क्या सिर्फ़ सीसीटीवी रिकॉर्ड हासिल करने के लिए?” बेंच ने इस बात पर भी गंभीर हैरानी जताई कि जालंधर की ट्रायल कोर्ट द्वारा सीनीयर पुलिस अधिकारियों की उपस्थित के लिए जमानती वारंट तक जारी कर दिए गए। जब डिफेंसेस की तरफ से कोई वाजिब कारण प्रस्तुत नहीं किया जा सका, तो हाईकोर्ट ने कहा कि जो अधिकारी न तो जांच का हिस्सा हैं और न ही गवाहों की सूची में शामिल हैं। उन्हें सिर्फ़ प्रसिद्धि पाने या ट्रायल लटकाने के लिए समन नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने दर्शाया कि सीपी लुधियाना ने कानून-व्यवस्था और अन्य गंभीर जिम्मेदारियों के मद्देनजर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मौजूदगी की अपील की थी, जिस पर जालंधर अदालत को गंभीरता से विचार करना चाहिए था। इसके बजाय मौजूदगी पर जोर देना न्यायपूर्ण सुझाव के अनुकूल नहीं है। हाईकोर्ट ने समनिंग आदेश के बाद हुई मीडिया कवरेज पर भी टिपणी करते हुए कहा कि अधूरी जानकारी और अटकले पर आधारित रिपोर्टिंग के जरिये सीनीयर पुलिस अधिकारियों की छवि को खराब करने का प्रयास किया गया, जो मीडिया की पारदर्शिता और समाज के भरोसे के लिए घातक है।
बता दें कि एनडीपीएस केस एक सफल और सुव्यवस्थित एंटी-ड्रग प्रक्रिया से संबंधित है। मार्च 2024 में जालंधर कलेक्टर पुलिस ने दो माह लंबी कार्रवाई के बाद एक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया था। इस दौरान 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 22 किलोग्राम अफीम बरामद हुई और नशे की कमाई से जुड़े लगभग ₹9 करोड़ के लेनदेन वाले 30 बैंक खाते जमा किए गए।
इस कार्रवाई के दौरान झारखंड से अफीम उगाने वाले अभि राम की गिरफ्तारी हुई, जबकि कोरियर नेटवर्क, हवाला ऑपरेटरों और विचौलियों की भूमिका भी सामने आई। जांच के दौरान 6 कस्टम अधिकारियों से जुड़े गंभीर तथ्य भी बेनकाब हुए, जिसमें दिल्ली से 4 कस्टम कर्मियों की गिरफ्तारी भी शामिल है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी, बरामदगी और पूरी सप्लाई चेन के भंग होने से स्पष्ट है कि ऐसे मामलों में सीनीयर पुलिस अधिकारियों को समन करने का कोई तार्किक आधार नहीं। इन तथ्यों के मद्देनजर, हाईकोर्ट ने जालंधर अदालत के समनिंग आदेश पर स्टे लगाते हुए सीपी लुधियाना को तुरंत राहत दी है।
