चंडीगढ़ः पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रिहायश पर प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने सरकार द्वारा 4 साल में किए गए कामों की उपलब्धियां बताई। प्रेस वार्ता के दौरान सीएम मान के साथ सेहत मंत्री बलबीर सिंह और सिंचाई मंत्री गोयल भी मौजूद रहे। सीएम मान ने बताया कि पंजाब में पहली बार पिछले 4 सालों में 67 हजार करोड़ बजट यूटीलाइज हुआ है। वहीं सिंचाई विभाग की ओर से क्रांतिकारी काम किया गया, जो आजादी से पहले और बाद में नहीं हुआ था। ऐसे में सिंचाई का पानी 75.89 लाख एकड़ इस्तेमाल किया जा रहा है।
सीएम मान ने कहा कि नहरी पानी से अब सिंचाई की जा सकती है। सीएम मान ने कहा कि 2022 से अब तक 20.90 लाख एकड़ में सिंचाई के लिए पानी यूटीलाइज होता है। 58 लाख एकड़ को अब पानी जा रहा है। ऐसे में आप सरकार के दौरान पानी में तीन गुणा बढ़ौतरी हुई है। सीएम मान ने बताया कि तरनतारन में 22 किलोमीटर लंबी सरहाली नहर को ढूंढ निकाला है, जिसे पिछली सरकारें बंद करके भूल गई थी और इसे चालू भी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों ने नहर बनाने को लेकर मांग की गई। जिसके बाद अधिकारियों ने नहर बनाने के लिए जगह को खोदने का काम शुरू किया तो वहां से बंद नहर अधिकारियों को मिली, जो 22 किलोमीटर लंबी है।
होशियारपुर और कपूरथला मेडिकल कॉलेजों के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्दी ही इनका काम शुरू हो जाएगा। वहीं, मलेरकोटला में बनने वाले कम्युनिटी मेडिकल के लिए जमीन एक्वायर करने की प्रक्रिया आखिरी चरण में है। कल ईद मौके वह लोगों को तोहफा देंगे। वहीं, 28 मार्च को 100 नए मोहल्ला क्लीनिक शुरू किए जाएंगे। 883 आम आदमी क्लीनिक राज्य में चल रहे हैं। 400 क्लीनिक और बनाए जा रहे हैं, ऐसे में 1400 क्लीनिक हो जाएंगे। 94 फीसदी मरीजों ने क्लीनिक की सेवाओं पर संतुष्टि जताई है। क्लीनिक की ओपीडी पांच करोड़ पार कर गई है। इसमें 1.69 करोड़ विशेष बीमारियों वाले मरीज थे। देश का सबसे बेहतरीन मॉडल है। 30 हजार गर्भवती महिलाओं का चेकअप हो चुका है।
इस दौरान उन्होंने विरोधियों पर भी जुबानी हमले किए थे। CM ने कहा था कि जो खुद को पानी के रक्षक कहते थे, उन्होंने अपने कार्यकाल में पानी नहीं संभाला और जिन पर बाणी की जिम्मेदारी थी उन्होंने बाणी को रोल दिया। इसी प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा था कि 1960 के बाद से राजस्थान ने पानी के बदले रॉयल्टी नहीं दी। यह 1.44 करोड़ लाख बनती है। हालांकि, पहले पानी का भुगतान होता रहा है। 1920 से यह सिस्टम चल रहा था। हमने इस मामले में राजस्थान सरकार को पत्र लिखा है। वहीं, मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाएंगे।
