मोहालीः पंजाब में अक्सर विवादों में रही अनुसूचित जाति के बच्चों की स्कॉलरशिप को लेकर कैबिनेट मंत्री डा. बलजीत कौर ने प्रेस वार्ता की। इस दौरान कैबिनेट मंत्री ने जहां पिछली सरकारो पर छात्रों की पढ़ाई को लेकर सवाल खड़े किए वहीं उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के लिए जारी स्कॉलरशिप के फंड को लेकर अहम खुलासे भी किए। इस दौरान कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पिछली सरकारों के समय में 2017 से 2020 तक अनुसूचित जाति के बच्चें स्कॉलरशिप स्कीम को लेकर काफी परेशान रहे। उन्होंने कहा कि 2017 में इस स्कीम में ऐसा शोध किया गया था कि उस दौरान ना तो केंद्र सरकार द्वारा बच्चों की पढ़ाई के पैसे भेजे गए और ना ही कांग्रेस सरकार द्वारा इस स्कीम को लेकर बच्चों को लाभ दिया गया। जिसके चलते कॉलेजों ने बच्चों की डिग्रियां रोकनी शुरू कर दी।
उन्होंने कहा कि 2022 में पंजाब में आई आप पार्टी की सरकार के बाद सीएम भगवंत मान की अगुवाई इस स्कॉलरशिप को लेकर ऑडिट करवाया तो पता चला 1563 करोड़ रुपए राशि कॉलेजों की बकाया पड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद तुरंत 2023 से पेंडिंग पैसा एक हजार से अधिक प्राइवेट संस्था के खातों में 366 करोड़ रुपए डाले गए। जिसके बाद सरकारी कॉलेजों में 92 करोड़ रुपए दिए गए। उन्होंने कहा कि 250 कॉलेजों को यह राशि अदा की गई। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार और केंद्र सरकार ने बच्चों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ किया, जिसे आप पार्टी ने बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए पहल के आधार पर इस स्कीम को दोबारा से चलाया गया।
उन्होंने कहा कि इस स्कीम का लाभ लेने वाले बच्चें 1.5 लाख के करीब पहुंच थे, लेकिन आज 2.31 लाख के करीब बच्चों ने इस स्कीम का लाभ लेने के लिए पत्र भेजे है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अब उनके पास 2.31 हजार बच्चे इस स्कीम का लाभ ले रहे है। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत केंद्र से 60 प्रतिशत और पंजाब सरकार द्वारा 40 प्रतिशत बच्चों को स्कीम में दिया जाता है। जिसमें पंजाब सरकार द्वारा 40 प्रतिशत के हिसाब से 92 करोड़ रुपए सरकारी कॉलेजों और प्राइवेट संस्था को 366 करोड़ रुपए अदा कर दिए गए है। वहीं अब केंद्र से अपील की है कि वह भी अपना बनता 60 प्रतिशत हिस्सा अदा करें।
वहीं स्कीम घोटाले को लेकर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि 9 कॉलेजों में बच्चों की फेक एडमिशन दिखाकर पैसे लिए जा रहे थे। जिसके बाद जब ऑडिट करवाया गया तो 9 कॉलेजों से रिकवरी करवाई गई और उन लोगों पर कार्रवाई भी की गई थी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के द्वारा उनसे अधिक ग्रांट दे दी गई थी, जिसके बाद अब इस स्कीम के स्कैम को रोकने के लिए अब डायरेक्टर कॉलेजों के खाते में पैसे नहीं डाले जाते बल्कि बच्चों के खातों में आधार के साथ डाले जाते है।