रूपनगर: पुलिस ने नकली वेबसाइट्स व सिस्टम के जरिए “क्यू फॉर्म” तैयार कर उनके माध्यम से सप्लाई करने के मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले की जानकारी देते हुए एसएसपी मनिंदर सिंह ने बताया कि ये गिरोह नकली क्यू फॉर्म रेत, बजरी आदि निर्माण सामग्री की गैरकानूनी ढंग से ढुलाई के लिए इस्तेमाल हो रहे थे, जिससे पंजाब सरकार को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा था।
एसएसपी ने कहा कि पकड़े गए दोषियों के पास 9 मोबाइल फोन और 2 लैपटॉप भी बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अरुण कुमार उर्फ राणा निवासी होशियारपुर, हरिंदरपाल भल्ला उर्फ नोनू (नोनू भल्ला) निवासी रूपनगर, गुरमीत सिंह निवासी सरसा नगर जालंधर जिला रूपनगर और अखिलेश प्रताप शाही निवासी विवेक पुरम तारामंडल सिद्धार्थ इनक्लेव एसओ गोरखपुर उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर नंबर 0014 मिति 16/01/2026 थाना नगर में धाराएं 318(4), 336(2), 336(3), 340(2), 338, 61(2) बीएनएस और धाराएं 66, 66(सी), 66(डी) आईटी एक्ट 2000 के तहत दर्ज की गई हैं। एसएसपी ने बताया कि डीएसपी डिटैक्टिव जतिंदर चौहान और डीएसपी नगर हरकीरत सिंह की अगवाई में विभिन्न टीमें बनाई गई थीं।
यह कार्रवाई स्पेशल ब्रांच टीम इंचार्ज इंस्पेक्टर गुरविंदर सिंह ढिल्लों, सीआईए स्टाफ इंचार्ज इंस्पेक्टर मनदीप सिंह के साथ थाना नगर की टीम मुखी इंस्पेक्टर सिमरनजीत सिंह और न्य नगर इंचार्ज सरताज सिंह के सहयोग से संयुक्त रूप से की गई। एसएसपी ने बताया कि जांच के मुताबिक दोषियों ने एक सुगठित गिरोह बना कर पंजाब सरकार के माइनज़ एंड जियोलॉजी पोर्टल जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट तैयार की ताकि ट्रांसपोर्टरों और enforcement एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके। उन्होंने कहा कि असली सरकारी वेबसाइट https://minesandgeology.punjab.gov.in/ है मगर इन लोगों ने नकली/बोगस वेबसाइट https://minesandgeology.punjabgou.in/ बनाई थी।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान सामने आया है कि गुरमीत सिंह पिछले लगभग 2 साल से अखिलेश प्रताप शाही के संपर्क में था और वह इस नकली पोर्टल/वेबसाइट को तभी से बना और टेस्ट कर रहा था। यह गैरकानूनी रैकेट पिछले 5-6 महीनों से सक्रिय रूप से काम कर रहा था। इस बोगस पोर्टल के जरिए दोषी विभिन्न ट्रक नंबरों के लिए नकली क्यू फॉर्म तैयार कर ट्रक ड्राइवरों/ट्रांसपोर्टरों को सप्लाई कर रहे थे। ये नकली क्यू फॉर्म गैरकानूनी ढंग से कागज़ों पर कानूनी दिखावे के लिए इस्तेमाल हो रहे थे, जिससे वाहनों की आवाजाही आसान हो जाती थी और पंजाब सरकार को बड़ा नुकसान हो रहा था।
उन्होंने बताया कि अब तक यह सामने आया है कि दोषियों ने लगभग 450-500 नकली फॉर्म तैयार किए हैं।उन्होंने कहा कि अगली जांच जारी है, जिसके तहत नकली क्यू फॉर्म का इस्तेमाल करने वाले और लाभ लेने वाले अन्य ट्रांसपोर्टरों की पहचान की जा रही है। शामिल ट्रकों की पूरी सूची और मूवमेंट डिटेल्स की पुष्टि की जा रही है। वेबसाइट ट्रेल, होस्टिंग डिटेल्स, लॉगिन और भुगतान संबंधी पूरे डिजिटल सबूत ट्रेस किए जा रहे हैं। इस रैकेट से जुड़े पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।