लग चुका 19.80 लाख का जुर्माना और दर्ज हो चुकी 302 FIR
कपूरथलाः जालंधर में दिवाली के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी हवा में सुधार नहीं आया है। बीते दिन शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 307 दर्ज किया गया। जालंधर प्रशासन के अनुसार अब तक जिले में 7 किसानों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। 9 मामलों में रेड एंट्री की गई है, जबकि 6 किसानों को चेतावनी नोटिस जारी हुए हैं। दिवाली से पहले जालंधर में 17 और 18 अक्टूबर को 3 पराली आगजनी के मामले आए थे। इस सीजन में एक दिन में सबसे ज्यादा 4 मामले 25 अक्टूबर को दर्ज किए गए। शाहकोट क्षेत्र से सबसे अधिक घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। जिले में अब तक केवल 16 पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। जिसमें दिवाली से पहले 3 और दिवाली के बाद 13 मामले शामिल है।
पंजाब में पराली की घटनाओं में एक बार फिर से बढ़ौतरी हो गई है। दरअसल, सोमवार को पराली जलाने के मामले में पंजाब में एक नया रिकॉर्ड बना है। पंजाब प्रदूषण बोर्ड के द्वारा जारी आकंड़ों के अनुसार राज्य में एक दिन में सोमवार यानी 27 अक्टूबर को पराली जलाने की 147 नई घटनाएं दर्ज की गईं। यह इस सीजन का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है जब एक दिन में इतनी पराली जलाई गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से अब तक पराली जलाने की कुल घटनाओं की संख्या बढ़कर 890 हो गई है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, तरनतारन और अमृतसर जिलों में सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। राज्य सरकार की अपील के बावजूद कई किसान फसल अवशेष जलाना जारी रखे हुए हैं। एक सप्ताह में पराली जलाने के मामलों में बढ़ौतरी हुई है। दरअसल, 20 अक्टूबर तक कुल 353 मामले दर्ज किए गए थे। जबकि 27 अक्टूबर तक आकंड़ा बढ़कर 890 तक पहुंच गया है। ऐसे में एक सप्ताह में पराली जलाने के 537 नए केस सामने आए है। जिसमें तरनतारन और अमृतसर पराली जलाने के हॉट सपॉट एरिया बने है।
तरनतारन में सबसे ज्यादा 249 घटनाएं पाई गई है, जबकि अमृतसर में 169 घटनाएं सामनेे आई है। वहीं फिरोजपुर में 87, सगंरूर 79, पटियाला 46, गुरदासपुर 41, कपूरथला 35, बठिंडा 38, एसबीएस नगर 3, होशियारपुर 3, मालेकोटला 4 और लुधियाना में 9 मामले दर्ज किए गए है। वहीं पठानकोट और रूपनगर में अब तक पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। किसानों की लगभग 60 प्रतिशत कटाई पूरी हो चुकी है, जिसके कारण पराली जलाने का कारण मुख्य माना जा रहा है।
पीपीसीबी के अनुसार, इस वर्ष पंजाब में 31.72 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की गई। 26 अक्टूबर तक इस क्षेत्र का 59.82% हिस्सा साफ़ हो चुका था। (आने वाले दिनों में आग बढ़ने की संभावना है)। सरकार द्वारा अब तक 19.80 लाख का जुर्माना लगाया जा चुका है और 302 एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन पराली जलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई कर रहा है। अब तक 386 मामलों में कुल 19.80 लाख का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है, जिसमें से 13.40 लाख की वसूली हो चुकी है।
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 223 (किसी सरकारी अधिकारी के आदेश की अवज्ञा) के तहत कुल 302 एफआईआर दर्ज की हैं। (यह धारा पहले आईपीसी की धारा 188 के अंतर्गत आती थी)। राज्य प्रशासन ने उन किसानों की जमीन रिकॉर्ड्स में 337 ‘रेड एंट्री’ भी की हैं, जिन्होंने फसल अवशेष जलाए हैं। ‘रेड एंट्री’ का मतलब होता है कि ऐसे किसान अपनी जमीन पर ऋण नहीं ले सकते या उसे बेच नहीं सकते।