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पंजाबः स्कूल, कॉलेजों के बाहर बिक रहे नशे को हाईकोर्ट ने पुलिस-एंटी नारकोटिक्स सेल को दिए ये आदेश

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चंडीगढ़ः पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ के शिक्षण संस्थानों, स्कूल, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के बाहर नशा बेचने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग और एंटी नारकोटिक्स सेल को आदेश दिए हैं कि वे उन जगहों की पहचान करें, जहां नशा बिकने की सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। इसके बाद नशा तस्करों की कमर तोड़ने के लिए मिलकर कार्रवाई करें। हाईकोर्ट ने यह आदेश देते हुए पिछले 10 साल से नशे के कारोबार को लेकर लंबित याचिका का निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि नशे पर लगाम के लिए पंजाब सरकार को पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अब हरियाणा व चंडीगढ़ प्रशासन को भी इन निर्देशों लागू करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी उन स्कूलों की सूची तैयार करें, जिनके आसपास सबसे ज्यादा नशा बिकने की शिकायतें मिलती हैं, ताकि वहां प्रभावी कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही नाबालिगों और युवाओं में बढ़ते ड्रग्स के चलन पर सख्ती से रोक लगाने के लिए शिक्षण संस्थानों, स्कूल, कॉलेजों के बाहर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाए ताकि कोई भी ड्रग पैडलर इन शिक्षण संस्थानों के बाहर नजर न आए। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि जेलों में नशे के कारोबार की लगातार शिकायतें मिलती रही हैं। इसे देखते हुए जेल में स्निफर डॉग्स की तैनाती की जाए, ताकि यहां आने वाले हर व्यक्ति और सामान की जांच हो सके और पता लगाया जा सके कि ड्रग्स तो नहीं लाई जा रही है। इसके अलावा जेल में कैदियों की भी जांच की जाए। कैदियों के नशे में मिलने पर इलाज के साथ उन्हें डी-एडिक्शन सेंटर भेजा जाए। इसके साथ किसी आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने से पहले उसका मेडिकल करवाया जाए और रिकॉर्ड मेंटेन किया जाए।

हाईकोर्ट ने कहा कि नशे के दलदल से बाहर आने वालों का पुनर्वास जरूरी है। सरकार छह माह में हर जिले में पुनर्वास केंद्र बनवाए। हर केंद्र में एक साइकेट्रिस्ट और काउंसलर की नियुक्ति की जाए। जिस काउंसलर की रिहैबिलिटेशन केंद्र में नियुक्ति की जाए, वह एरिया के सभी स्कूलों का दौरा कर छात्रों को नशे के दुप्रभावों के बारे में भी जागरूक करे। ड्रग मामले में पंजाब के पूर्व डीजीपी (जेल) शशिकांत ने उनकी सुरक्षा को जारी रखने का निर्देश देने की हाईकोर्ट से अपील की थी लेकिन हाईकोर्ट ने सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश जारी करने से इन्कार कर दिया है। शशिकांत ने ही जेलों में नशे के कारोबार को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को शिकायत दी थी। इस शिकायत को आधार बनाकर हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया था और सुनवाई आरंभ की थी। नशे के कारोबारियों और राजनेताओं के बीच साठगांठ को लेकर उन्होंने कुछ सबूत भी सौंपे थे, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई गई थी।

कपूरथला के बरिंदर दत्त ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि उनके बेटे की कपूरथला डी एडिक्शन सेंटर में जान चली गई थी। वहां मौजूद अटेंडेंट याची के बेटे को प्रताड़ित करता था, जिसके चलते उसने आत्महत्या कर ली। बरिंदर दत्त ने अपील की थी कि इसके लिए सरकार मुआवजा जारी करे। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही बरिंदर दत्त का बेटा तनाव में था और उसमें आत्महत्या करने की आदत दिखाई देती थी, लेकिन इसे रोकना राज्य की जिम्मेदारी थी। सेंटर में बरिंदर दत्त के बेटे को उसके अटेंडेंट ने थप्पड़ मारा था। कोर्ट की राय है कि डी एडिक्शन सेंटर के स्टाफ को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए, ताकि वे इन रोगियों के प्रति संवेदनशील हों। हाईकोर्ट ने सेंटर में मौजूद रोगी को सरकार की जिम्मेदारी माना है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि वह बरिंदर दत्त को पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर जारी करे।

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