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स्वतंत्रता के बाद पंजाब को गैर-कानूनी तरीके से अपनी राजधानी से वंचित रखा गया है; चंडीगढ़ हमारा है और रहेगा: CM Mann

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कहा- राष्ट्रीय स्तर पर बेमिसाल योगदान के बावजूद पंजाब को अभी भी अपनी राजधानी और हाई कोर्ट देने से इनकार किया जा रहा है

होशियारपुरः गणतंत्र दिवस पर होशियारपुर में राष्ट्रीय तिरंगा लहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस अवसर पर पंजाब के संवैधानिक अधिकारों की जोरदार पुष्टि करते हुए अपनी सरकार के शासन रिकॉर्ड का विस्तारपूर्वक विवरण दिया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब की बेमिसाल कुर्बानियों और देश के अन्नदाता व खड़गभुजा के रूप में इसकी निरंतर भूमिका को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद राज्य को इसकी राजधानी और अलग हाई कोर्ट से गैरकानूनी तरीके से वंचित रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़, पंजाब यूनिवर्सिटी और इसके पानी के अधिकारों पर पंजाब के दावे को कमजोर करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब अपने हितों की रक्षा के लिए हर रोज कानूनी और संवैधानिक कार्रवाई करता रहेगा।

शासन को विरासत और विश्वास से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस की ऐतिहासिक यादगार, श्री अमृतसर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। उन्होंने घोषणा की कि श्री गुरु रविदास जी का 650वां प्रकाश पर्व इस साल 1 से 20 फरवरी, 2027 तक राज्य स्तरीय कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाएगा।

शासन की दिशा को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ और ‘गैंगस्टरों पर वार’ के तहत नशों, गैंगस्टरों और नारको-ड्रोन के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई, 10 लाख रुपए तक की सार्वव्यापी स्वास्थ्य सुविधा, रिश्वत के बिना 63,000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान करना और सड़क सुरक्षा फोर्स के माध्यम से सड़क हादसों में मौतों में तेजी से कमी आई है। उन्होंने मनरेगा में अनुसूचित जाति और बेजमीन परिवारों को प्रभावित करने वाले बदलावों पर भी चिंता जताई, 1.5 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड निवेश का हवाला दिया, जिससे 5.2 लाख नौकरियां पैदा हुईं और 13 से 15 मार्च तक पंजाब निवेश सम्मेलन की घोषणा की।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “देश और इसके लोगों के प्रति अथाह योगदान के बावजूद पंजाब के पास अपनी राजधानी नहीं है। आजादी के बाद पंजाब को गैर-कानूनी तौर पर इससे वंचित रखा गया है। स्थिति को और बिगाड़ने के लिए राज्य को इसकी राजधानी, पंजाब यूनिवर्सिटी, पानी और अन्य अधिकारों से वंचित करने के लिए रोजाना साजिशें रची जा रही हैं। यह कभी नहीं होने दिया जाएगा। चंडीगढ़, पंजाब का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा और राज्य सरकार अपनी राजधानी वापस लेने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।”

अलग हाई कोर्ट न होने पर गुस्सा जाहिर करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पंजाब के पास अपना हाई कोर्ट नहीं है, जबकि उत्तर-पूर्व के छोटे राज्यों की अपनी राजधानियां हैं। उन्होंने कहा, “अपनी हाई कोर्ट की अनुपस्थिति में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में मामलों की बड़ी संख्या के कारण पंजाबियों को बहुत परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।” देश भर के सभी पंजाबियों और नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनी जानें कुर्बान करने वाले हजारों देश भक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

थल सेना, जल सेना और वायु सेना के बहादुर सैनिकों को सलाम करते हुए मुख्यमंत्री ने देश की प्रभुसत्ता, एकता और अखंडता की रक्षा में उनकी शानदार भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा, “1950 में इस दिन, देश का संविधान लागू हुआ था। यह सभी भारतीयों के लिए बहुत खास दिन है। यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के गौरवशाली नागरिक हैं।”

इस पवित्र अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहिब डॉ. भीम राव अंबेडकर के संविधान बनाने में दिए गए अनमोल योगदान को श्रद्धा के फूल अर्पित किए। उन्होंने कहा कि पंजाबी इस बात पर गर्व करते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम में सबसे अधिक कुर्बानियां पंजाबी योद्धाओं ने दी। उन्होंने कहा, “हर पंजाबी को जुल्म और बेइंसाफी के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा हमारे महान गुरुओं की शिक्षाओं से मिली है।”

बाढ़ों के बाद राज्य को फिर पैरों पर खड़ा करने में मददगार बनने वालों के शुक्रगुजार होते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे इन योद्धाओं को सिजदा करते हैं जिन्होंने भयानक बाढ़ों के बावजूद पंजाब का जन-जीवन फिर लीक पर डाल दिया। उन्होंने कहा, “प्राकृतिक आपदा के बावजूद राज्य कुछ घंटों में फिर अपने पैरों पर खड़ा हो गया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की खातिर पंजाब ने अपने कीमती प्राकृतिक संसाधनों उपजाऊ मिट्टी और जल संसाधनों को कुर्बान कर दिया। उन्होंने कहा कि महान कुर्बानियों के बावजूद पंजाब लगातार बेइंसाफी और भेदभाव का सामना कर रहा है और राज्य को अपने हक लेने के लिए कानूनी, विधायी और प्रशासकीय स्तर पर लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

पंजाब के साथ सौतेली मां वाला सलूक होने का जिक्र करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि इसके हकों को छीनने के लिए साजिशें रची जा रही हैं। उन्होंने कहा, “बी.बी.एम.बी. और पानी पर पंजाब के कानूनी हकों पर छापा मारने की बुरी चालें चली गई थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसे सफल नहीं होने दिया।”

होशियारपुर जिले की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह पंजाब का सबसे अधिक पढ़ा-लिखा जिला है, लिंग अनुपात में सबसे ऊपर है, एथलेटिक्स और फुटबॉल में इसका बड़ा योगदान है। इस जिले के कस्बे माहिलपुर को विश्व स्तर पर फुटबॉल की नर्सरी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि होशियारपुर में मेडिकल कॉलेज पर काम जल्दी शुरू हो जाएगा और फरवरी में होने वाले ‘नेचर फेस्ट’ के लिए पोस्टर जारी किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने परेड का निरीक्षण किया, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखा और गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान प्राप्तियों हासिल करने वालों को सम्मानित किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने परेड कमांडर धीरेंद्र वर्मा आई.पी.एस. और सहायक परेड कमांडर रमनप्रीत सिंह गिल के नेतृत्व वाली परेड का निरीक्षण किया और पंजाब पुलिस, पंजाब होमगार्ड्स, पैसको, एन.सी.सी., बॉय स्काउट्स, पुलिस कैडेट्स, गर्ल गाइड्स और पंजाब पुलिस ब्रास बैंड की टुकड़ियों से सलामी ली।

पी.ए.पी. जालंधर टीम द्वारा टेंट पेगिंग और भांगड़ा, गिद्दा, समूह डांस, पी.टी. शो और स्कूली विद्यार्थियों द्वारा समूह गायन सहित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किया गया।

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान किया, दिव्यांगजन व्यक्तियों को ट्राइसाइकिल और जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित की। इस मौके पर राज्य और जिला प्रशासन के विकास को दर्शाती झांकियां भी प्रदर्शित की गईं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान समाज में शानदार योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों की व्यक्तियों और अन्य अधिकारियों को भी सम्मानित किया।

 

 

 

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