चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने प्रदेश के माइनिंग क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार करते हुए पंजाब माइनर मिनरल पॉलिसी में बड़े संशोधनों को मंजूरी दी है। इन सुधारों का उद्देश्य कच्चे माल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना, अवैध खनन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना, उपभोक्ताओं के लिए कीमतें कम करना, राज्य के राजस्व में वृद्धि करना और एकाधिकार को समाप्त करना है। मंत्रिमंडल ने विभिन्न स्तरों पर हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद इन संशोधनों को स्वीकृति दी है, जिससे माइनिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और नागरिक-हितैषी शासन को बढ़ावा मिलेगा।
खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य माइनिंग सेक्टर की जटिलताओं को समाप्त कर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग जनहित में सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि नई माइनिंग श्रेणियों—क्रशर माइनिंग साइट्स (CRMS) और लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स (LMS)—की शुरुआत से रेत और बजरी की कानूनी उपलब्धता बढ़ेगी, स्थानीय उद्योगों और किसानों को सशक्त किया जाएगा तथा अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।

सरकार ने माइनिंग से जुड़ी मंजूरियों को भी मिशन मोड में लाकर प्रक्रियाओं को सरल किया है और पिछले तीन वर्षों में पहली बार पारदर्शी ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया शुरू की है। पहले चरण में 29 साइटों की नीलामी से 11.61 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि 200 से अधिक नई माइनिंग साइटों की पहचान की जा चुकी है, जो 2025-26 तक चालू होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने कहा कि ये व्यापक सुधार राज्य में कानूनी, पारदर्शी और जन-केंद्रित माइनिंग व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
