चंडीगढ़ः प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब में एक पूर्व नायब तहसीलदार को धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया है। उस पर एसएएस नगर जिले में एक गांव की जमीन की बिक्री में कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। ईडी ने बताया, वरिंदर पाल सिंह धूत को वीरवार को गिरफ्तार किया गया। ईडी ने ‘पीएमएलए’ के तहत केस पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर किया गया है। उल्लेखनीय है कि वीरेंद्र पाल सिंह धूत व अन्य के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
जांच में पाया गया कि धूत सियोंक गांव की पंचायत भूमि के नाम पर 99 एकड़ से अधिक की हिस्सेदारी के गलत आवंटन के मामले में शामिल है। यह जमीन कुछ ग्रामीणों और बाहरी लोगों को आवंटित की गई है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि धूत और कुछ अन्य लोगों ने छह ग्रामीणों के नाम पर जमीन अवैध तरीके से बेची। इस जमीन का मूल्य 50 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। वहीं दूसरी ओर अब तक की गई जांच में यह सामने आया है कि वीरेंद्र पाल सिंह धूत सहित राजस्व अधिकारियों और अन्य लोगों ने सिउंक गांव के शामलाट जमीन गांव के 6 लोगों के नाम की। जिसके बाद कुछ निजी प्रापर्टी डीलरों ने उनसे पावर ऑफ अटॉर्नी ले ली। यह जमीन बाद में राजस्व विभाग के अधिकारियों और प्रापर्टी डीलरों की मिलीभगत से जमीन बाहरी लोगों को बेच दी गई।
जमीन की इस बिक्री से प्राप्त आय को राजस्व अधिकारियों और संपत्ति डीलरों द्वारा साझा कर ली। जबकि गांव के उन लोगों को, जिनसे मुख्तारनामा ले लिए गए थे, उन्हें बहुत ही थोड़ी रकम दी गई थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वीरेंद्र पाल सिंह धूत और उनके परिवार के सदस्यों के खातों में 15 करोड़ रुपये से अधिक पाई गई। जिसमें 8 करोड़ रुपये ‘नकद’ भी शामिल है। वीरेंद्र पाल सिंह धूत इन खातों में बड़ी रकम का सही हिसाब नहीं दे सके। जमीन की अनुमानित कीमत 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह भी पता चला है कि शामलात के जमीन खरीदारों के दोस्तों और रिश्तेदारों से मिली रकम धूत के रिश्तेदारों के खातों में आई थी।
