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Punjab: Congress को 40 साल बाद मिली जीत, 3 बार अकाली ने लहराया था परचम

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4 बार विधायक रह चुके नेता को भाजपा ने उतारा था मैदान में

फिरोजपुरः लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी शेर सिंह घुबाया ने 3242 वोटों से जीत हासिल की । हालांकि फिरोजपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस, आप, अकाली दल और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी के जगदीप सिंह काका बराड़ 263384 वोट लेकर दूसरे, भाजपा के राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी 255097 वोट लेकर तीसरे और अकाली दल के नरदेव सिंह बॉबी मान को 253645 वोट मिले। वहीं इस सीट से शेर सिंह घुबाया ने 266626 वोट पाकर 3242 वोटों की बढ़त के साथ जीत हासिल की। ​​इसके बाद कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। पिछले तीन चुनावों में यहां अकाली दल ने जीत दर्ज की है। घुबाया दो बार अकाली दल के सांसद रह चुके हैं। भाजपा ने कांग्रेस से 4 बार विधायक रह चुके राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को मैदान में उतारा था। वहीं आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक जगदीप सिंह काका बराड़ यहां से पार्टी को जीत नहीं दिला पाए।

1984 में गुरदयाल सिंह ढिल्लों ने की थी जीत हासिल

वहीं कांग्रेस उम्मीदवार शेर सिंह घुबाया ने फिरोजपुर संसदीय सीट पर कांग्रेस पार्टी को 40 साल बाद जीत दिलाई है। इससे पहले साल 1984 में गुरदयाल सिंह ढिल्लों ने कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ते हुए इस सीट पर जीत हासिल की थी। आखिरकार फिरोजपुर की सीट कांग्रेस पार्टी के झोली में आ गई। 1989 में आजाद उम्मीदवार भाई ध्यान सिंह मंड, 1992 और 1996 में बीएसपी के मोहन सिंह फ्लियांवाला, 1998, 1999 और 2004 में शिरोमणि अकाली दल बादल के जोरा सिंह मान इस सीट से जीतते रहे। उनके निधन के बाद अकाली दल बादल ने 2009 और 2014 के चुनाव में शेर सिंह घुबाया को मैदान में उतारा जोकि दोनों जीते थे। 2019 के चुनाव में घुबाया के कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के बाद अकाली दल और बीजेपी गठबंधन ने यहां सुखबीर सिंह बादल को मैदान में उतारा और बड़ी जीत हासिल की। अब 2024 में कांग्रेस ने एक बार फिर शेर सिंह घुबाया पर भरोसा किया और उन्हें चुनाव मैदान में उतारा, जिसमें कांटे की टक्कर के बावजूद घुबाया ने सीट जीत ली है और कांग्रेस पार्टी को 40 साल बाद जीत की खुशी दी।

इस सीट से 1952 से हो रही वोटिंग 

पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से एक फिरोजपुर में साल 1952 से ही वोटिंग हो रही है। यहां पहले चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के बहादुर सिंह विजयी हुए। उनके बाद 1957 और 1962 में कांग्रेस के इकबाल सिंह जीते। 1967, 1969, 1971 और 1977 के चुनावों में इस सीट पर फिर से शिरोमणि अकाली दल का कब्जा रहा। फिर 1980 और 1984 में यहां से कांग्रेस जीती, लेकिन 1989 में यह इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार काबिज हो गए। 1992 और 1996 में इस सीट पर बसपा को भी जीत मिली और उसके बाद से लगातार शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार चुनाव जीत रहे हैं। इस लोकसभा क्षेत्र के दायरे में राज्य की 9 विधानसभा सीटें हैं. इनमें फिरोजपुर सिटी, गुरू हार सहाय, जलालाबाद, फजिलका, अबोहार और मुक्तसर के अलावा फिरोजपुर रूरल, बालूआना और मालौत शामिल है।

फिरोजपुर सीट क्यों हैं खास?

फिरोजपुर पंजाब का एक जिला और एक लोकसभा क्षेत्र है। 2011 की जनगणना के अनुसार, फिरोजपुर की आबादी दो मिलियन से अधिक है और साक्षरता दर 68.92% है। सतलुज नदी के तट पर स्थित इस शहर की स्थापना फिरोज शाह तुगलक ने की थी। यह भारत और पाकिस्तान के बीच एक सीमावर्ती जिला है। इस जिले का फाजिल्का विधानसभा क्षेत्र स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की समाधियों का घर है। इस जिले में वाघा बॉर्डर भी है। फिरोजपुर संसदीय सीट में नौ विधानसभा सीटें शामिल हैं। फिरोजपुर संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाले नौ विधानसभा क्षेत्रों में से तीन अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं।

पिछले चुनाव में क्या रहा?

साल 2019 में यहां 72.47 फीसदी वोटिंग के साथ शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर हुई थी। हालांकि शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर सुखबीर सिंह बादल 6 लाख 33 हजार वोट पाकर चुनाव जीत गए थे। वहीं दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस पार्टी के शेर सिंह घुबाया को महज 4 लाख 34 हजार वोट मिले और वह करीब 1 लाख 98 हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में इस सीट पर 72.62 फीसदी वोटिंग के साथ त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। उस समय शेर सिंह घुबाया शिरोमणि अकाली दल में थे और इसी पार्टी के टिकट पर 4 लाख 87 हजार 932 वोट पाकर चुनाव जीत गए थे। वहीं दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस पार्टी के सुनील कुमार जाखड़ 4 लाख 56 हजार वोट पाकर करीब 31 हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे। इसी प्रकार आम आदमी पार्टी के सतनाम पॉल कंबोज 1 लाख 13 हजार वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

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