चंडीगढ़, 29 मार्च 2026: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब कैबिनेट ने राज्य में जनकल्याण, विकास और प्रशासनिक सुधारों को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए। इन फैसलों में सबसे बड़ा निर्णय “मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना” को मंजूरी देना रहा, जिसका उद्देश्य महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
यह फैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।
महिलाओं को ₹1000–₹1500 मासिक सहायता
इस योजना के तहत पंजाब की सभी पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि अनुसूचित जाति (SC) की महिलाओं को ₹1500 प्रति माह मिलेंगे। यह योजना राज्य की 97% से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचाएगी और देश की सबसे बड़ी महिला कल्याण योजनाओं में से एक मानी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे अपने खर्चों का निर्णय खुद कर सकेंगी।
यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजी जाएगी। इस योजना में परिवार की सभी पात्र महिलाएं लाभ ले सकेंगी, यानी संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी।
18 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाएं, जो पंजाब की मतदाता हैं और जिनके पास वैध आधार कार्ड और वोटर आईडी है, इस योजना के लिए पात्र होंगी। पहले से सामाजिक सुरक्षा पेंशन लेने वाली महिलाओं को भी इस योजना का लाभ उनके पेंशन के साथ मिलेगा।
योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार विशेष अभियान चलाएगी, खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में, ताकि महिलाओं को रजिस्ट्रेशन, बैंक खाते और जरूरी दस्तावेजों में मदद मिल सके।
सरकार ने इस योजना के लिए 2026–27 के बजट में ₹9,300 करोड़ की राशि पहले ही मंजूर कर दी है।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
सरकार का मानना है कि राज्य में प्रगति के बावजूद कई महिलाएं अभी भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं हैं। यह योजना इस कमी को दूर करेगी और महिलाओं की भूमिका को परिवार और समाज में मजबूत बनाएगी।
इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा और महिलाएं सामाजिक व आर्थिक फैसलों में अधिक भागीदारी कर सकेंगी।
भर्ती और प्रशासनिक सुधार
कैबिनेट ने योजना के अलावा कई अन्य अहम फैसले भी लिए। योजना विभाग में 70 पदों पर सीधी भर्ती को मंजूरी दी गई है। यह फैसला आर्थिक नीति एवं योजना बोर्ड और सांख्यिकी निदेशालय के विलय के बाद लिया गया है।
इससे राज्य में नीति निर्माण और डेटा प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
बिजली क्षेत्र और कोयला परियोजना से जुड़े फैसले
कैबिनेट ने PSPCL और PSTCL में चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) और डायरेक्टर पदों की नियुक्ति के नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी है, ताकि बिजली क्षेत्र में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
इसके अलावा झारखंड के पचवाड़ा कोल माइंस के संचालन और रखरखाव के लिए संविदा आधार पर स्टाफ की भर्ती को भी मंजूरी दी गई है। इसके लिए एक सशक्त समिति भी बनाई गई है, जो भर्ती और अन्य संबंधित मामलों पर निर्णय लेगी।
उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लीजहोल्ड इंडस्ट्रियल प्लॉट्स को फ्रीहोल्ड में बदलने की नीति में संशोधन को मंजूरी दी गई है। अब बैंक में गिरवी रखे प्लॉट भी आवश्यक शर्तों के साथ फ्रीहोल्ड में बदले जा सकेंगे।
इसके अलावा पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) संशोधन बिल, 2026 को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत इंडस्ट्रियल एरिया के बेहतर प्रबंधन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाए जाएंगे।
ये SPV सड़क, स्ट्रीट लाइट, पार्क, ड्रेनेज और सुरक्षा जैसी सुविधाओं का प्रबंधन करेंगे। इनके कामकाज की निगरानी के लिए जिला स्तर पर मॉनिटरिंग अथॉरिटी भी बनाई जाएगी।
नदी प्रबंधन और हाईवे परियोजनाएं
कैबिनेट ने सतलुज नदी में डीसिल्टिंग के नियमों में ढील देने को भी मंजूरी दी है, ताकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की परियोजनाओं के लिए सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
यह कदम राज्य में बेहतर नदी प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ सड़क निर्माण कार्यों को तेज करने में मदद करेगा।
समावेशी विकास पर सरकार का फोकस
कुल मिलाकर, कैबिनेट के ये फैसले राज्य में समावेशी विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और पंजाब को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाया जा सके।