पुलिस ने की फायरिंग, छोड़े आंसू गैस के गोले, 80 से ज्यादा घायल
नेपालः काठमांडू में आज सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ हजारों युवाओं ने सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया। मिली जानकारी के अनुसार इस आंदोलन को ‘Gen Z Revolution’ का नाम दिया गया है। हाल ही में सरकार द्वारा 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे फेसबुक, यूट्यूब, व्हाट्सएप और एक्स, पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया था। वहीं सरकार के इस फैसले को लेकर लोगों में रोष पाया जा रहा है। जिसके चलते प्रदर्शनकारी न्यू बानेश्वर में संसद भवन के परिसर में घुस गए। इस दौरान पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और हवाई फायरिंग का इस्तेमाल किया। इस हिंसक झड़प में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक घायल हुए।
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ਨੇਪਾਲ ‘ਚ ਸੋਸ਼ਲ ਮੀਡੀਆ ਬੈਨ ‘ਤੇ ਭੜਕੀ ਨੌਜਵਾਨ ਪੀੜ੍ਹੀ, ਕਾਠਮਾਂਡੂ ‘ਚ ਹੰਗਾਮਾ, ਸੰਸਦ ਭਵਨ ਨੂੰ ਲਗਾਈ ਅੱਗ
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए काठमांडू में दोपहर 12:30 बजे से रात 10 बजे तक कर्फ्यू लगा दिया गया। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेट फार्म पर प्रतिबंध लगाने को लेकर सरकार का तर्क है कि ये कंपनियां नेपाल में पंजीकरण और कर भुगतान से बच रही थीं। हालांकि, युवाओं और मानवाधिकार संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। ‘हामी नेपाल’ जैसे संगठनों ने प्रदर्शन का आह्वान किया, और काठमांडू के माइतीघर मंडला और न्यू बानेश्वर में हजारों युवा जमा हुए। प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकार के इस कदम के खिलाफ नारेबाजी कर रहे है।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर संसद भवन के परिसर में प्रवेश की कोशिश की। कुछ युवा पुलिस के गार्ड हाउस पर चढ़ गए और नारेबाजी की। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और कुछ स्थानों पर हवाई फायरिंग की। दमक में पुलिस की गोलीबारी में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई, और न्यू बानेश्वर में कई लोग घायल हुए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी पेड़ की टहनियां और पानी की बोतलें पुलिस पर फेंकते दिखे। काठमांडू जिला प्रशासन ने न्यू बानेश्वर चौक, एवरेस्ट होटल, मिन भवन, शांतिनगर, टिनकुने चौक, रत्न राज्य सेकेंडरी स्कूल और शंखमूल ब्रिज तक कर्फ्यू लागू किया।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया बैन को देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी बताया, लेकिन इस फैसले की विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने कड़ी आलोचना की। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने इसे “अत्याचार” करार दिया, जबकि काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने इसे Gen Z का “स्वतःस्फूर्त आंदोलन” बताकर समर्थन जताया, हालांकि उन्होंने आयु सीमा के कारण प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया। मानवाधिकार संगठनों, जैसे कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स, ने इस बैन को प्रेस स्वतंत्रता के लिए खतरनाक बताया और तत्काल हटाने की मांग की।
काठमांडू के अलावा पोखरा, बीरतनगर और बुटवल जैसे शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। युवाओं ने राष्ट्रीय झंडे लहराए और भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लगाए। टिकटॉक, जो नेपाल में पंजीकृत है, पर वायरल वीडियो में नेताओं के बच्चों की शानदार जीवनशैली और आम नागरिकों की गरीबी की तुलना दिखाई गई, जिसने आंदोलन को और हवा दी।