धर्म: वृंदावन की गलियों में इन दिनों भक्ति का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है क्योंकि हमेशा की तरह इस बार भी 18 और 19 मार्च को राधा रानी के भक्त और राधा केलि कुंज वाले श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। 18 मार्च से शुरु हुए इस उत्सव में भक्ति, संगीत और संतों के समागम ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन प्रेमानंद महाराज का जन्मदिन होता है इसलिए उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे।
वृंदावन में हुआ संतों का संगम
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प्रेमानंद महाराज के जन्मदिन के मौके पर एक बार फिर संतों का अनूठा संगम देखने को मिला। ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि उत्सव की शुरुआत संतों के स्वागत और पाद-प्रक्षालन के साथ हुई। कई बड़े आश्रमों के पीठाधीश्वर और जटाधारी संत पीले और सफेद वस्त्रों में महाराज के चरणों में नमन करने पहुंचे। संतों ने महाराज को माला पहनाई और तिलक लगाकर उनका सम्मान किया। इस दौरान राधा-राधा के जप से पूरा परिसर गूंज रहा था।
फूलों की बनाई गई रंगोली
प्रेमानंद महाराज के जन्मोत्सव का आकर्षण पुष्प वर्षा और फूलों की रंगोली रही है। भक्तों ने महाराज के स्वागत में जमीन पर गुलाब और गेंदे के फूलों की सुंदर कालीन बिछाई गई थी। साथ ही उत्सव के दौरान कलाकारों ने राधा-कृष्ण का रुप रखकर सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे महाराज खुद भी भाव-विभोर होकर भक्तों के प्रेम को स्वीकार कर रहे हैं।
कहां हुआ प्रेमानंद महाराज का जन्म
प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक ब्राह्माण परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। उनकी दोनों किडनियां खराब होने के बाद भी वो काफी ऊर्जा और भक्ति के साथ भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं। महाराज अपनी उम्र और शरीर का लेकर ज्यादा चर्चा करना पसंद नहीं करते लेकिन उनके जीवन के सफर और सन्यास के सालों को देखें तो उनकी उम्र 57 साल हो गई है।
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अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म 30 मार्च 1969 को हुआ था लेकिन वो हिंदू कैलेंडर विक्रम संवत के हिसाब से चैत्र नवरात्रि के पहले दिन जन्मदिन मनाते हैं।
भक्तों के लिए खास संदेश
जन्मोत्सव के दौरान महाराज ने अपने भक्तों से किसी भी दिखावे से दूर रहने और सिर्फ नाम जप पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। उन्होंने सिखाया कि भगवान के प्रति समर्पण ही जीवन का असली सुख है। उत्सव में पहुंचे भक्तों ने उनके स्वास्थ्य के लिए खास प्रार्थना की और महाराज ने सभी को आशीर्वाद दिया।
