अमृतसर: सचखंड श्री हरमंदिर साहिब जिसे पूरी मानवता का आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। जहां, हर साल की तरह इस बार भी ऐतिहासिक बेरी पर लगे फलों (बेर) से इसकी शोभा और बढ़ गई है। श्री दरबार साहिब की परिक्रमा में स्थित प्राचीन दुखभंजनी बेरी, बेर बाबा बुड्ढा जी और लाची बेरी पर इस साल भी खूब बेर लगे हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं।
दरबार साहिब आने वाली संगत की गहरी श्रद्धा का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोग इन बेरियों के नीचे घंटों बैठकर इस इंतज़ार में रहते हैं कि कब कोई बेर टूटकर अपने आप नीचे गिरेगा। सिख परंपराओं के अनुसार, इन ऐतिहासिक बेरियों से बेर तोड़ना मना है, इसलिए संगत केवल उन्हीं बेर को प्रसाद के रूप में स्वीकार करती है जो ज़मीन पर गिरे होते हैं।
दुखभंजनी बेरी का विशेष महत्व
दुखभंजनी बेरी का विशेष महत्व बीबी रजनी जी के इतिहास से जुड़ा है, जहाँ उनके पति के दुख दूर हुए थे। आज भी श्रद्धालु मानते हैं कि ये बेर केवल एक फल नहीं हैं, बल्कि गुरु घर की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक हैं। इन बेरियों को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञों और शिरोमणि कमेटी द्वारा विशेष प्रयास किए जाते हैं, ताकि ये लंबे समय तक बनी रहें।
परिक्रमा के दौरान बेरियों के नीचे बैठी संगत जब गुरबाणी का पाठ करती है और जब कोई बेर नीचे गिरता है, तो वे उसे श्रद्धापूर्वक अपने माथे से लगाकर ग्रहण करते हैं। देश-विदेश से आए श्रद्धालु इस आध्यात्मिक दृश्य को देखकर भावुक हो जाते हैं। यह आस्था और धैर्य का एक अनूठा उदाहरण है, जहां एक छोटे से फल की आस में लोग चिंताओं को भूलकर भक्ति में लीन हो जाते हैं।
