नई दिल्ली: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में यह स्वीकार कर लिया है कि अमेरिका के कहने पर पाकिस्तान उसकी जंगों में शामिल हुआ है। इसका खामियाजा अब तक भुगत रहा है। उन्होंने अमेरिका पर भी तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि यूएस ने पाकिस्तान का इस्तेमाल टॉयलेट पेपर से भी बदतर तरीके से किया यानी की जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल किया और फिऱ फेंक दिया। ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान युद्ध का खासतौर पर जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए रेंटेड वॉर लड़ी यानी की अमेरिका के हितों के लिए जंग लड़ी। उन्होंने इसे Made In America Jihad बताया है और माना है कि पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ जाकर अमेरिका का साथ दिया परंतु बदले में अमेरिका ने पाकिस्तान को छोड़ दिया।
टॉयलेट पेपर की तरह किया इस्तेमाल
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया है और इस्तेमाल करने के बाद कूड़े में फेंक दिया। इससे पाकिस्तान में हिंसा, आर्थिक स्थिरता और लंबे समय तक नुकसान हुआ। उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व तानाशाहों जनरल जिया उल हक और जनरल परवेज मुशर्रफ पर भी निशाना साधा और कहा कि ये फैसले उनकी राजनीतिक मजबूती के लिए थे न कि इस्लाम या धर्म के लिए। आसिफ ने ये भी स्वीकार किया है कि पाकिस्तान अक्सर अपने अतीत की गलतियों से इंकार करता है और ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
क्या अमेरिका और चीन के बीच में फंसा पाकिस्तान?
दुनिया की दो महाशक्तियों को एक साथ साधने की फिराक में पाकिस्तान फंस गया है। अमेरिका भारत के करीब आ रहा है जिससे पाकिस्तान असहज हो गया है। चीन सीपीईसी ने पाकिस्तान को बांधे रखता है लेकिन पाकिस्तान आईएमएफ के बेलआउट के लिए अमेरिाक पर निर्भर रहता है पाकिस्तान दोनों से बैलेंस करने की कोशिश करता है लेकिन पाकिस्तान आईएमएफ के बेलआउट के लिए अमेरिका पर निर्भर रहता है। पाकिस्तान दोनों से बैलेंस करने की कोशिश करता है लेकिन आर्थिक संकट में फंसकर दोनों ओर से दबाव झेल रहा है।
अमेरिका पर भड़ास निकाल रहे ट्रंप
आसिफ का टॉयलेट पेपर वाला बयान पाकिस्तान की विदेश नीति की विफलता को दिखाता है। ये कोई नई बात नहीं है बल्कि पाकिस्तान लंबे समय से सुपरपावरों के बीच बैलेंस करने में फंसा है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिकी राष्ट्रपति को मक्खन लगा रहे हैं। व्हाइट हाउस में पहुंचकर उन्होंने ट्रंप को पाकिस्तान के खनिज संसाधनों का तोहफा भी पेश किया है। इन सबके बीच में आसिफ का अमेरिका पर नाराज होना पाकिस्तान की विदेश नीति पर बड़े सवाल खड़े करता है।