अमृतसरः गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व पर भारत से 1,900 सिख श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था पाकिस्तान के ननकाना साहिब जाने के लिए रवाना हुआ। दरअसल, श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व में शामिल होने के लिए भारतीय श्रद्धालुओं का पहला जत्था पाकिस्तान गया। जहां कई श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान में स्थित गुरु नानक देव के जन्मस्थान ननकाना साहिब के भी दर्शन किए हैं। श्रद्धालुओं में सिख और हिंदू दोनों शामिल थे। इस धार्मिक यात्रा में शामिल हिंदू श्रद्धालुओं को वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तानी अधिकारियों ने रोक दिया और उन्हें सीमा पार करने से मना कर दिया। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया।

उसने धर्म-कर्म के मामले में भी अपनी नीच हरकत दिखाई। पाकिस्तान ने ननकाना साहिब गुरुद्वारा गए सिख श्रद्धालुओं का तो फूलों से स्वागत किया, मगर हिंदू श्रद्धालुओं को सीमा पार करने की इजाजत नहीं दी। सिख श्रद्धालुओं के जत्थे में गए हिंदू श्रद्धालुओं को अपमानित करके पाकिस्तानी अधिकारियों ने वापस लौटा दिया। ऐसे 14 परिवार हैं, जिनके साथ पाकिस्तान ने बदसलूकी की है। इस्लामाबाद का कहना है कि यह 14 लोग सिख नहीं थे, इसलिए इन्हें गुरुद्वारे में नहीं जाने दिया गया। ननकाना साहिब जाने वाले 14 सिखों को पाकिस्तानी हुकूमत ने साफ आदेश दिया, “तुम हिंदू हो, इसलिए तुम सिख श्रद्धालुओं के साथ नहीं जा सकते हो।”
इनमें ज्यादातर लोग दिल्ली और लखनऊ से थे और एंट्री न मिलने पर यह सभी लोग वापस लौट आए। 300 अन्य लोगों ने पाकिस्तान के वीजा के लिए आवेदन किया था, लेकिन गृह मंत्रालय से अनुमति नहीं ली थी। ऐसे में सभी लोगों को बॉर्डर से ही वापस लौटा दिया गया। पाकिस्तान की ओर की गई इस कार्रवाई को ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों समुदायों के बीच फूट डालने की साजिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। गुरु नानक जयंती का मुख्य पर्व लाहौर से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुरुद्वारा जन्मस्थान पर मनाया जाएगा। पाकिस्तान में गए भारतीय सिख श्रद्धालु वहां 10 दिन तक रुकेंगे। इस दौरान सभी को गुरुद्वारा पंजा साहिब हसन अब्दाल, गुरुद्वारा सच्चा सौदा फारुकाबाद और गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर भी ले जाया जाएगा।