धर्म: सूर्य जब किसी भी राशि में प्रवेश करते हैं तो इसको संक्रांति कहते हैं। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करें तो मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य मकर राशि में दोपहर को 3:13 पर प्रवेश करेंगे। इस दिन सुबह उठकर स्नान-दान और ध्यान का खास महत्व बताया गया है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में यह त्योहार अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, गुजरात में उत्तरायण और उत्तर भारत में खिचड़ी या मकर संक्रांति के तौर पर इसे मनाया जाता है।
शुभ मुहूर्त
इस बार मकर संक्रांति पर पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरु होगा। वहीं महापुण्य काल भी दोपहर में 3 बजकर 13 मिनट से शुरु होकर शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस दिन गंगा स्नान सुबह 9 बजकर 3 मिनट से लेकर 10 बजकर 48 मिनट तक होगा।
पूजा विधि
इस दिन सूर्य उदय से पहले गंगा या फिर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि पवित्र नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो स्नान के जल में ही गंगाजल मिला लें। सूर्यदेव की पूजा करके उन्हें अर्घ्य दें। अर्घ्य के जल में रोली, चावल और लाल फूल डालें। इस दिन गुड़ चावल, वस्त्र और कंबल का दान करें। तिल गुड़ के लड्डू, खिचड़ी और मौसमी व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करें। इसके साथ ही गीता और भगवान सूर्य की उपासना से जुड़े ग्रंथों का पाठ भी जरुर करें।
खास महत्व
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति वाले दिन गंगा नदी के साथ-साथ पवित्र नदियों, कुओं, तीर्थों और सरोवरों में स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऊनी कपड़े, कंबल, जूते, धार्मिक ग्रंथों और पंचाग का दान करना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। मकर संक्रांति का पर्व सूर्य की उपासना का पर्व होता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से मिलने के लिए मकर राशि में जाते हैं। ऐसे में यह पर्व फसल की कटाई के साथ भी जुड़ा हुआ है। खासतौर पर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में इसका खास महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर असुरों का संहार करने के लिए धर्म की स्थापना की थी। ऐसे में यह माना जाता है कि गंगा भागीरथ के पीछे-पीछे स्वर्ग से पृथ्वी पर भी आई थी। इसी दिन के बाद से उन्हें पतित पावन कहा जाने लगा था।