पहलगाम का हमला याद कर छलके आंसू, बोलीं – हालातों ने किया मजबूर
अमृतसरः पहलगाम में हुए आतंकी हमले का असर दिन ब दिन देखने को मिल रहा है। इस हमले के बाद से पाकिस्तान के कुछ नागरिकों को भी इसके परिणाम झेलने पड़ रहे हैं। भारत सरकार के आदेशों अनुसार मेडीकल वीजे पर आए पाकिस्तान के नागरिकों का आज भारत छोड़ने का आखिरी दिन था जिसके चलते पाकिस्तान के कराची से इलाज के लिए भारत आई नूरजहां को अपना इलाज अधूरा छोड़कर अपने देश लौटना पड़ा है। नूरजहां अपने इलाज के लिए मुंबई आई थीं और उनके पास मई तक का वीजा था।
जानकारी देते हुए नूरजहां ने कहा कि पाकिस्तान में मुझे बताया गया था कि भारत में इलाज अच्छा है। इसीलिए मैं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पाने के लिए यहां आई थी, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल के कारण मुझे अपना इलाज बीच में ही छोड़कर वापस लौटना पड़ा। पहलगाम में हुई घटना पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पहलगाम में जो कुछ भी हुआ वह बहुत दुखद है। ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। भले ही कोई मर जाए, लेकिन इंसान का खून तो बहता ही है। नूरजहां की कहानी उन अनेक लोगों में से एक है जो उम्मीद लेकर सीमा पार जाते हैं, लेकिन राजनीतिक तनाव और घटनाओं के कारण उन्हें अपनी उम्मीदें त्यागने पर मजबूर होना पड़ता है।
भारत में मिले उपचार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यहां के लोगों ने उन्हें बहुत प्यार और समर्थन दिया है। उसे ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि वह पाकिस्तान छोड़कर आई है। उन्होंने बताया कि उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। पाकिस्तान में निजी इलाज बहुत महंगा है और सरकारी अस्पताल में केवल अपना डोनर ही अंग ट्रांस्पलांट कर सकता है। यही कारण है कि वह इलाज के लिए भारत आईं थीं।