ऊना/ सुशील पंडित: राजकीय महाविद्यालय ऊना में 27 मार्च 2026 को नशा निवारण समिति की मासिक बैठक प्राचार्या डॉ. मीता शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही नशे की समस्या, विशेषकर चिट्टा (स्मैक) के बढ़ते दुरुपयोग, पर गंभीरता से विचार करना और इसके प्रभावी समाधान तलाशना था। बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों, नगर परिषद के प्रतिनिधियों तथा महाविद्यालय के शिक्षकों ने भाग लेकर अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि चिट्टा का प्रचलन दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जो युवाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इस समस्या को केवल कानून व्यवस्था के माध्यम से नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। सभी उपस्थित सदस्यों ने इस दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
प्राचार्या डॉ. मीता शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षण संस्थानों की भूमिका नशा मुक्ति अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, परामर्श सेवाओं को सशक्त बनाने तथा अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि युवाओं को सही दिशा और सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित किया जाए, तो नशे की प्रवृत्ति को काफी हद तक रोका जा सकता है। राजस्व विभाग और नगर परिषद के अधिकारियों ने भी अपने स्तर पर निगरानी बढ़ाने, अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने तथा स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि बस अड्डे पर उपलब्ध विभिन्न डिजिटल स्क्रीन का उपयोग नशा विरोधी संदेशों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक यह संदेश प्रभावी रूप से पहुंच सके। अंत में, सभी प्रतिभागियों ने नशे के बढ़ते प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए समन्वित और निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि समाज को इस गंभीर समस्या से मुक्त कराया जा सके।
