भूस्खलन से 3 नेशनल हाईवे सहित 577 सड़कें बंद
बिलासपुरः हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले की उप तहसील नम्होल के गांव गुतराहन में शनिवार सुबह बादल फटने से तबाही हुई है। कई वाहन मलबे में दब गए हैं। वहीं ग्रामीण कश्मीर सिंह के खेतों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। फसलों को भारी क्षति हुई है। गनीमत रही कि इस प्राकृतिक आपदा में किसी तरह का जानी नुकसान नहीं हुआ। दो दिन से हो रही लगातार बारिश के कारण घुमारवीं में सीर खड्ड का जलस्तर बढ़ गया है। इस बरसात में यह स्तर सबसे ज्यादा है। राज्य में शनिवार सुबह 10:00 बजे तक भूस्खलन से तीन नेशनल हाईवे सहित 577 सड़कें बंद रहीं।
389 बिजली ट्रांसफार्मर व 333 जल आपूर्ति स्कीमें भी प्रभावित हैं। कुल्लू जिले में 174, मंडी 166, शिमला 48, कांगड़ा 45, चंबा 44 व सिरमाैर में 28 सड़कें बंद हैं। उधर,भरमौर-पठानकोट हाईवे पर तुन्नूहट्टी, लाहड़, मैहला के समीप बीती रात भारी बारिश से भूस्खलन हुआ है। इससे हाईवे पर छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। रफ्तार थमने से वाहन चालकों और यात्रियों को वाहनों में बैठकर हाईवे बहाल होने का इंतजार करना पड़ा। एनएच मंडल के अधिशासी अभियंता मीत शर्मा ने बताया कि भारी बारिश के कारण हाईवे पर पेड़ गिरने, मलबा आने से वाहनों की रफ्तार थमी।
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य के कई भागों में 19 सितंबर तक बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान है। 13 व 14 सितंबर के लिए कुछ स्थानों पर भारी बारिश, अंधड़ चलने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। अलर्ट के बीच शनिवार सुबह से कई भागों में झमाझम बारिश हो रही है। इस मानसून सीजन के दौरान अभी तक कुल 4,465 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। 20 जून से 12 सितंबर तक 386 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 451 लोग घायल हुए हैं। 41 लोग अभी भी लापता हैं। इस दौरान 168 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई है। राज्य में 538 पक्के, 834 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। 1878 पक्के और 4005 कच्चे मकानों को आंशिक तौर पर नुकसान हुआ है।
