वृंदावन से पधारे कथा व्यास स्वामी भागवत शरण जी महाराज ने प्रवचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महत्ता पर व्याख्यान किया। कथा व्यास ने कहा कि जब-जब अत्याचार, अनाचार व अन्याय बढा है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है, अत्याचार को समाप्त कर धर्म की स्थापना को लेकर ही प्रभु का अलग-अलग रूपों में अवतार होता है।जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड दी, तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कथा के दौरान बासुदेव, यशोदा व श्रीकृष्ण के बाल-रूप की झांकी देख सभी श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए नृत्य करने लगे। प्रवचन के क्रम में कथा व्यास ने कहा कि जीवन में अच्छे रास्ते पर जाना है, तो संकल्प लेना जरूरी है।
हर बच्चे को अपने माता-पिता व गुरू की बातों को मानना चाहिए, जिन बच्चों के उपर माता-पिता का आशीर्वाद है, उन्हें संसार में सब कुछ प्राप्त है। हर एक माता-पिता को चाहिए कि अपने साथ बच्चों को भागवत कथा, सत्संग, कीर्तन में जरूर साथ लाएं। धर्म की कथा सुनने से बच्चों में अच्छे संस्कार आते है। शिव मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के आयोजन से भक्तिमय माहौल बना हुआ है। भागवत कथा के दौरान व्यास पूजा, भजन, झांकी व आरती में कथा के अंत में प्रसिद्ध आरती ‘श्री भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती’ का सामूहिक रूप से गायन हुआ, फिर श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण भी किया गया।