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सोनू शाह कत्लकांड मामले में लॉरेंस बिश्नोई समेत 5 आरोपियों को मिली राहत

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चंडीगढ़ः बहुचर्चित राजवीर सिंह उर्फ सोनू शाह हत्याकांड में जिला अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। दरअसल, 7 साल पुराने केस में कोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई समेत 5 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। हालांकि 3 आरोपियों को हत्या सहित अन्य धाराओं में दोषी ठहराया। दोषियों की सजा पर 20 फरवरी को फैसला सुनाया जाएगा। अदालत ने लॉरेंस बिश्नोई के अलावा धर्मेंद्र सिंह, अभिषेक उर्फ बंटी, राजू बसोदी और दीपक रंगा को संदेह का लाभ दिया। वहीं शुभम उर्फ बिगनी, मंजीत उर्फ मोटा और राजन उर्फ जाट को दोषी करार दिया गया। सभी आरोपी अलग-अलग जेलों चंडीगढ़, दिल्ली, अंबाला और गुजरात में बंद हैं।

पंजाब इंटेलिजेंस की मोहाली स्थित बिल्डिंग में आरपीजी अटैक मामले में भी वह आरोपी है। सोनू शाह हत्याकांड में पुलिस लॉरेंस बिश्नोई की भूमिका साबित नहीं हो सकी। अन्य आरोपियों के खिलाफ भी पुलिस के पास पुख्ता सबूत नहीं थे। इससे पहले पुलिस ने कहानी बनाई थी कि लॉरेंस बिश्नोई के इशारे पर कुछ शूटरों ने सोनू शाह की बुड़ैल स्थित उसके ऑफिस में घुसकर हत्या कर दी थी। 28 सितंबर 2019 को शूटर सोनू शाह के बुड़ैल स्थित ऑफिस में घुसे और ताबड़तोड़ फायरिंग कर फरार हो गए थे। वारदात के कुछ दिनों बाद सभी शूटर पकड़े गए थे।

उनके बयानों पर पुलिस ने लॉरेंस को भी आरोपी बना लिया था। सुनवाई के दौरान लॉरेंस बिश्नोई ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही दी। उसने अदालत को बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से जेल में बंद है और इस मामले के अन्य आरोपियों से उसका कोई संबंध नहीं है। लॉरेंस ने कहा कि उसके पास से कोई भी संचार उपकरण बरामद नहीं हुआ और उसे केवल इसलिए फंसाया गया क्योंकि उसने और उसके समुदाय ने राजस्थान में काले हिरण शिकार मामले में अभिनेता सलमान खान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। आरोप था कि जेल से संचालित नेटवर्क के जरिए साजिश रची गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के कई साक्ष्य टिक नहीं सके। घायल गवाह जोगिंदर सिंह का मृत्यु प्रमाण पत्र अदालत में पेश नहीं किया जा सका। उसकी पत्नी ने बयान दिया कि वह वर्षों से अलग रह रही है और उसे पति की स्थिति की जानकारी नहीं। दूसरे घायल परमिंदर की मृत्यु रिपोर्ट 19 जनवरी 2026 को अदालत में आई, जिसके बाद उसका नाम गवाह सूची से हटा दिया गया। दो अहम गवाह होटल मैनेजर विपिन और चंदन पहचान से मुकर गए। घटना वाले दिन की सीसीटीवी फुटेज जब्त नहीं की गई।

कथित वॉयस मैसेज के लिए आवाज के नमूने लिए गए पर फॉरेंसिक लैब नहीं भेजे गए। मोहाली के एक होटल रजिस्टर में धर्मेंद्र के हस्ताक्षर और आधार एंट्री होने के बावजूद वह रजिस्टर पुलिस रिकॉर्ड से गायब मिला। बचाव पक्ष ने दलील दी कि शिकायतकर्ता और मृतक के भाई ने केवल तीन दोषी करार आरोपियों की पहचान की थी। अन्य के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं थे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बयान देते हुए लॉरेंस बिश्नोई ने कहा कि वह 12 वर्षों से जेल में है, मृतक को नहीं जानता और उसे झूठा फंसाया गया। साबरमती जेल के डीएसपी जिग्नेश एस. चावला ने गवाही दी कि 28 अगस्त 2023 को स्थानांतरण के बाद तलाशी में कोई संचार उपकरण नहीं मिला। अदालत ने अंतिम बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखकर सुनाया। अब तीन दोषियों की सजा पर पूरे मामले की दिशा तय होगी।

 

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