ऊना/सुशील पंडित: अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ की हिमाचल इकाई के तत्वावधान में कवि-कथाकार कुलदीप शर्मा के पहले उपन्यास ‘मलबा’ का लोकार्पण गुरुवार को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ऊना के कॉन्फ्रेंस हॉल में गरिमामय समारोह के बीच हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतिष्ठित साहित्यकार प्रो. सुरेश सेठ ने की, जबकि उत्तर भारत के विभिन्न प्रांतों से आए ख्यातिलब्ध साहित्यकारों, लेखकों और बुद्धिजीवियों ने इसमें भाग लिया।

ऊना के निवासी कुलदीप शर्मा आईपीएच विभाग से सेवानिवृत्त हैं और कविता के क्षेत्र में एक सशक्त नाम हैं। उनकी कविताओं के संग्रहों ने पाठकों और समीक्षकों के बीच गहरी छाप छोड़ी है। ‘मलबा’ उनके सृजनधर्मी व्यक्तित्व का विस्तार है, एक ऐसा उपन्यास जो संवेदनशीलता, सामाजिक यथार्थ और रचनात्मक तीखेपन को साथ लेकर चलता है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. सेठ ने कहा कि ‘मलबा’ उपन्यास का इस समय आना इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक और राजनीतिक यथास्थिति के विरुद्ध प्रतिकार के स्वर आज भी जीवित हैं। उन्होंने कहा, “साहित्य दिलों में लौ जलाता है, यह हमें अपने परिवेश से परिचित कराता है, असहमति और आक्रोश पैदा करता है और अंततः अन्याय पर प्रहार के लिए प्रेरित करता है।”
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. धर्मपाल साहिल ने उपन्यास पर शोध-पत्र प्रस्तुत करते हुए इसकी भाषा-शैली, कथानक और बिंब-विधान की विस्तृत चर्चा की और इसे सामाजिक विसंगतियों को उजागर करने वाली सशक्त कृति बताया। हिमाचल के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पूर्व उपनिदेशक एवं लेखक सतीश धर ने कहा कि ‘मलबा’ भ्रष्ट व्यवस्था के उन चेहरों को बेनकाब करता है, जो आम आदमी को उसके अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखते हैं।
लेखक कुलदीप शर्मा ने बताया कि यह उपन्यास एक निर्धन परिवार के गिरे घर के मलबे को प्रतीक बनाकर राहत और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में व्याप्त भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार करता है।
समारोह में अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य अधिवक्ता विजय डोगरा, ऊना डिग्री कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. मीता शर्मा, हिमाचल प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव, देवेंद्र धर, वरिष्ठ पत्रकार रंजू एरी और साहित्यकार प्रो. प्रोमिला अरोड़ा व डॉ. अनिल पांडे , जिला भाषा अधिकारी निक्कू राम ने अपने विचार रखे। वहीं कवि साहित्यकार संदीप आकाश खड़वाल, पत्रकार सुशील पंडित, तरसेम, डॉ. नरजोध सिंह, नरेश घई, स्नेह लता नेगी, नरेंद्र शर्मा, रत्तन चांद निर्झर, मनमोहन शर्मा, पवन शर्मा, रंजीत सिंह, रोशन जसवाल, संजय वर्मा, अशोक कालिया, स्नेह नेगी समेत अनेक साहित्यकारों, पत्रकारों और अध्यापकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
दूसरे सत्र में पचास से अधिक कवियों के कवि-सम्मेलन ने समारोह को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन कॉलेज की सहायक प्रोफेसर श्रेयसी सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन स्वयं लेखक कुलदीप शर्मा ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर उपन्यास के लेखक कुलदीप शर्मा ने बताया कि मलबा में एक निर्धन के गिरे हुए घर से एकत्र मलबा को उपन्यास का आधार बनाते हुए राहत और कार्यवाही की दिशा में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रहार किया गया है । यह उपन्यास 160 पेज का है , इससे पूर्व कुलदीप शर्मा की कविताओं की पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं । कार्यक्रम के दुसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें पचास से अधिक कवियों ने अपनी कविताओं से समा बाँध दिया।
